बिहार(Bihar) में शराबबंदी के बावजूद नशे का काला कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है, और अब हाजीपुर से सामने आए ताज़ा आंकड़ों ने स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले डेढ़ से दो महीनों के भीतर यहाँ 100 से ज्यादा युवा एचआईवी (HIV) पॉजिटिव पाए गए हैं। इनमें सबसे डराने वाली बात यह है कि संक्रमित होने वालों में 25 से 30 साल की उम्र के युवाओं की संख्या सबसे अधिक है। जांच में यह बात सामने आई है कि ये युवा इंजेक्शन के जरिए नशा करते हैं और सबसे गंभीर बात यह है कि कई लोग नशे के लिए एक ही सिरिंज को आपस में साझा (Share) करते हैं।
इसी एक सिरिंज के बार-बार इस्तेमाल से खून के जरिए एचआईवी का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। हालांकि शराबबंदी और इन नए मामलों के बीच सीधा संबंध तलाशने के लिए ठोस सबूतों की जरूरत है लेकिन जमीन पर स्थिति बेहद गंभीर है। जिला एड्स कंट्रोल अधिकारी डॉ. अजय के मुताबिक, एचआईवी के ये ज्यादातर नए मामले ग्रामीण और दियारा इलाकों से आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन इलाकों तक अपनी पहुँच बनाकर युवाओं को इस जानलेवा संक्रमण से बचाने की है।
महज डेढ़ महीने में 100 से अधिक नए मामले
स्वास्थ्य विभाग की हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले डेढ़ से दो महीनों के अंतराल में ही 100 से ज्यादा युवा एचआईवी पॉजिटिव पाए गए हैं। इनमें भी खासतौर पर 25 से 30 वर्ष की आयु वर्ग के युवाओं की बढ़ती संख्या ने चिकित्सा विशेषज्ञों और प्रशासन की चिंता को काफी बढ़ा दिया है।
समय पर जांच ही एकमात्र समाधान
एचआईवी पॉजिटिव पाए जाने का कतई यह अर्थ नहीं है कि किसी व्यक्ति का जीवन समाप्त हो गया है। आज के समय में इस बीमारी के लिए उचित उपचार और बेहतरीन देखभाल की सुविधा पूरी तरह उपलब्ध है। यदि संक्रमण का पता शुरुआती दौर में ही चल जाए और समय पर सही इलाज शुरू हो जाए तो पीड़ित व्यक्ति एक सामान्य और लंबा स्वस्थ जीवन जी सकता है।
अमूमन असली चुनौती तब पैदा होती है जब लोगों को अपनी इस स्थिति की जानकारी नहीं होती और वे अनजाने में जोखिम भरे व्यवहार को जारी रखते हैं। इसलिए सतर्कता बरतना और समय-समय पर अपनी जांच करवाना बेहद जरूरी है।