इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्ती के बाद उत्तर प्रदेश में कथित फर्जी शैक्षिक डिग्री के आधार पर वकालत में पंजीकरण कराने के मामलों में कार्रवाई तेज हो गई है। इसी क्रम में प्रयागराज(Prayagraj) के सिविल लाइंस थाने में 12 अधिवक्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने मामला दर्ज करने के बाद अब पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है। मामला बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के सचिव आरके शुक्ला की शिकायत से जुड़ा है।
आरोप है कि संबंधित अधिवक्ताओं ने अलग-अलग विश्वविद्यालयों की शैक्षिक डिग्रियों के आधार पर बार काउंसिल में अपना पंजीकरण कराया था। बाद में दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान इन डिग्रियों पर सवाल उठे और उन्हें कथित तौर पर फर्जी पाया गया। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि संबंधित प्रमाणपत्र किन संस्थानों से जारी हुए उनकी वास्तविकता क्या है और बार काउंसिल में पंजीकरण के समय कौन-कौन से दस्तावेज जमा किए गए थे।
कई जिलों से जुड़े हैं नाम
एफआईआर में शामिल अधिवक्ताओं का संबंध उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से बताया गया है। इनमें लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, मथुरा, गौतमबुद्धनगर, हरदोई, सहारनपुर, गाजियाबाद और प्रतापगढ़ शामिल हैं।
मामले में नामजद लोगों में सुनील कुमार अवस्थी, नफीजुल हसन सिद्दीकी, शोभित कुमार यादव, पंकज कुमार, जय नारायण कटियार, नफीस अहमद, देवेश कुमार, श्याम सिंघल, पवन हिंदोल, दीपक कश्यप, अभय सर्वसेना और सत्यम मिश्रा बताए गए हैं।
जांच के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर
एफआईआर दर्ज होना आरोपों की जांच की शुरुआत है। पुलिस अब संबंधित विश्वविद्यालयों और बार काउंसिल के रिकॉर्ड का मिलान करेगी। दस्तावेजों की जांच और विवेचना पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे किन लोगों के खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई बनती है।