बिहार(Bihar) राज्य सरकार ने जनजातीय समुदाय के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत राज्य के आठ जिलों में कुल 19 नए छात्रावासों का निर्माण किया जाएगा। इस योजना का मकसद दूरदराज रहने वाले और वंचित वर्ग के छात्रों को पढ़ाई के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक आवासीय सुविधा देना है।
चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस परियोजना पर कुल 60 करोड़ 42 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें केंद्र और राज्य दोनों की भागीदारी शामिल है। केंद्र सरकार की ओर से 36 करोड़ 25 लाख रुपये और राज्य सरकार की ओर से 24 करोड़ 17 लाख रुपये का योगदान दिया गया है। यह राशि जल्द ही पश्चिम चंपारण, कटिहार, बांका, भागलपुर, जमुई, कैमूर, रोहतास और पूर्णिया जिलों को आवंटित की जाएगी।
हर छात्रावास में 100 छात्रों के रहने की व्यवस्था
योजना के तहत बनने वाले प्रत्येक छात्रावास में लगभग 100 विद्यार्थियों के रहने की व्यवस्था होगी। इनमें 15 से 18 वर्ष आयु वर्ग के छात्रों को प्राथमिकता के आधार पर रहने की सुविधा दी जाएगी ताकि वे बेहतर वातावरण में अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।
इन छात्रावासों का संचालन कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और नेताजी सुभाष चंद्र बोस छात्रावास की तर्ज पर किया जाएगा। केंद्र सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्रालय के सहयोग से इन्हें अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाने की योजना है।
वंचित समूहों तक शिक्षा पहुंचाने का लक्ष्य
यह पूरी पहल प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान के तहत की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों तक शिक्षा, आवास और अन्य बुनियादी सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है ताकि वे मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली से जुड़कर बेहतर भविष्य की ओर बढ़ सकें।