Ghaziabad Traffic Police Google Maps Alert: देश में लगभग रोजाना ही कहीं न कहीं सड़क हादसा होता ही है, इसी को ध्यान में रखते हुए गाजियाबाद ट्रैफिक पुलिस सड़क हादसों से लोगों को बचाने के लिए अब तकनीक का सहारा लेने जा रही है। जिले के 20 से ज्यादा दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट जल्द ही गूगल मैप पर दिखाई देंगे। इन जगहों के पास पहुंचते ही वाहन चालकों के मोबाइल पर वॉयस अलर्ट मिलेगा, जिससे वे पहले से सावधान होकर वाहन की स्पीड कम कर सकेंगे। ट्रैफिक पुलिस का मानना है कि यह नई व्यवस्था सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने और दुर्घटनाओं में कमी लाने में मददगार साबित होगी।
गूगल मैप पर मिलेगा पहले से अलर्ट
सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने ब्लैक स्पॉट की पूरी लिस्ट गूगल मैप से जुड़ी एजेंसी को भेज दी है। अब इन जगहों को गूगल मैप पर अपडेट किया जाएगा। जैसे ही कोई वाहन चालक ऐसे किसी ब्लैक स्पॉट के करीब पहुंचेगा, उसके मोबाइल पर वॉयस अलर्ट सुनाई देगा। यह अलर्ट चालक को पहले से सावधान करेगा कि आगे दुर्घटना संभावित क्षेत्र है, इसलिए वाहन की स्पीड कम रखें और सावधान होकर आगे बढ़ें। इससे चालक समय रहते सावधानी बरत सकेंगे और हादसे कम होने में मदद मिलेगी।
जहां पहले हो चुके हैं सबसे ज्यादा हादसे
ट्रैफिक पुलिस ने जिन जगहों को ब्लैक स्पॉट बनाया है, वहां पहले सबसे ज्यादा सड़क हादसे हुए हैं। इन जगहों में हादसों को कम करने के लिए NHAI, लोक निर्माण विभाग और नगर निगम की ओर से सड़क चौड़ीकरण, अतिरिक्त लेन का निर्माण, ट्रैफिक साइन बोर्ड, रोड मार्किंग, कैट्स आई और क्रैश बैरियर जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। इन सुधार कामों के बाद कई जगहों पर दुर्घटनाओं में कमी भी दर्ज की गई है।
इन इलाकों पर रहेगी खास नजर
फिलहाल जनपद में बस स्टैंड, मोहननगर तिराहा, वैशाली मेट्रो स्टेशन, कौशांबी मेट्रो स्टेशन और कौशांबी बस अड्डा समेत कई जगह अभी भी संवेदनशील ब्लैक स्पॉट की लिस्ट में शामिल हैं। हालांकि इनमें से ज्यादा जगहों पर सुधार के काम पूरे हो चुके हैं, लेकिन दुर्घटनाओं की संभावना को देखते हुए लगातार निगरानी जारी है। इसके अलावा दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर भी कई ब्लैक स्पॉट दर्ज किए गए हैं, जहां निगरानी रखी जा रही है।
जागरूकता बढ़ाने पर भी रहेगा जोर
डीसीपी ट्रैफिक त्रिगुण बिसेन ने बताया कि गूगल मैप पर ब्लैक स्पॉट अपडेट होने के बाद वाहन चालकों को पहले से अलर्ट मिलेगा। इससे वे समय रहते अपनी स्पीड काबू कर सकेंगे और सही तरीके से वाहन चला सकेंगे। उनका कहना है कि यह केवल तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि लोगों में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी प्रयास है। सड़क सुरक्षा तभी संभव है, जब प्रशासन के साथ-साथ हर वाहन चालक और पैदल यात्री भी अपनी जिम्मेदारी समझे और यातायात नियमों का पालन करें।
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