नसरापुर रेप और मर्डर केस में एक अहम घटनाक्रम के तहत, पुणे सेशंस कोर्ट ने सोमवार को आरोपी भीमराव कांबले को मौत की सज़ा सुनाई। यह फ़ैसला स्पेशल जज एस. आर. सालुंखे ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुनाया। यह मामला 3 साल की बच्ची के साथ रेप और उसकी हत्या से जुड़ा था, जिसने पूरे महाराष्ट्र में भारी आक्रोश पैदा कर दिया था।
पुणे सेशंस कोर्ट में कड़ी सुरक्षा के बीच हुई सुनवाई
कोर्ट ने 1 मई को नसरापुर इलाके में हुई इस बेरहम घटना के लिए कांबले को दोषी ठहराने के बाद सज़ा सुनाई। फ़ैसला सुनाते समय जज ने सज़ा के पीछे की वजहें भी बताईं।
पुणे सेशंस कोर्ट में कड़ी सुरक्षा के बीच सुनवाई हुई। चूंकि इस मामले ने लोगों का काफ़ी ध्यान खींचा था, इसलिए कोर्ट परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। सुनवाई के दौरान पीड़ित परिवार के सदस्य कोर्ट रूम में मौजूद थे।
स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर एडवोकेट अजय मिसर ने प्रॉसिक्यूशन का पक्ष रखा, जबकि दोनों पक्षों के वकीलों ने कोर्ट के सामने अपनी दलीलें पेश कीं। सुनवाई के दौरान, बचाव पक्ष ने नरमी बरतने और उम्रकैद की सज़ा देने की अपील की थी, लेकिन कोर्ट ने इस अपील को खारिज कर दिया और मौत की सज़ा सुनाई।
मौत की सज़ा के ऐलान
यह मामला नसरापुर में 3 साल की बच्ची के साथ बेरहमी से रेप और उसकी हत्या से जुड़ा है, जिसने राज्य को झकझोर कर रख दिया था और आरोपी के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की मांग उठाई थी। पुणे रूरल पुलिस ने घटना के तुरंत बाद भीमराव कांबले को गिरफ़्तार कर लिया था और जांच पूरी कर ली थी।
कोर्ट के बाहर सामाजिक कार्यकर्ता और पीड़ित परिवार के समर्थक न्याय की मांग के लिए जमा हुए। सख़्त सज़ा की मांग वाले पोस्टर भी दिखाए गए और लोगों ने बच्ची के लिए न्याय की आवाज़ उठाई। मौत की सज़ा के ऐलान के साथ ही, पुणे सेशंस कोर्ट ने महाराष्ट्र के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में से एक पर अपना फ़ैसला सुना दिया है।
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