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‘भारत के इतिहास का सबसे काला दौर…’, इमरजेंसी की 51वीं बरसी पर क्या बोले PM मोदी? आपातकाल को बताया संविधान पर सीधा हमला

Samvidhan Hatya Diwas: संविधान हत्या दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह दिन भारतीय लोकतंत्र के उस काले अध्याय की याद दिलाता है, जब लोकतांत्रिक व्यवस्था को गंभीर चोट पहुंची थी। उन्होंने कहा कि यह अवसर संविधान, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए सामूहिक प्रतिबद्धता को और मजबूत करने का संदेश देता है।

आपातकाल को बताया लोकतंत्र पर हमला

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने संदेश में कहा कि, ‘आज हम उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने भारत के इतिहास के सबसे काले दौर में से एक यानी ‘आपातकाल’ के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती से रक्षा की।’

नागरिक स्वतंत्रताओं पर लगी थीं पाबंदियां

प्रधानमंत्री ने कहा कि, ‘आपातकाल हमारे संविधान पर सीधा हमला था। इस दौरान नागरिक स्वतंत्रताएं छीन ली गईं, अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक लगाई गई, राजनीतिक नेताओं, पत्रकारों और समाज सेवकों को गिरफ्तार किया गया व उन संस्थाओं पर हमला किया गया, जो हमारे लोकतंत्र की नींव हैं। साथ ही उस दौर ने अनगिनत नागरिकों के असाधारण साहस को भी दिखाया, जिन्होंने चुप रहने से इनकार कर दिया और हमारे संविधान में निहित आदर्शों को बनाए रखा।’

संघर्ष करने वालों के साहस को किया याद

अपने संदेश में पीएम मोदी ने उन लोगों के साहस का भी जिक्र किया जिन्होंने प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद लोकतांत्रिक आदर्शों और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि उस दौर ने ऐसे अनेक नागरिकों का अद्भुत साहस भी दुनिया के सामने रखा, जिन्होंने चुप रहने के बजाय अपने अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए संघर्ष का रास्ता चुना।

संविधान को बताया देश की आकांक्षाओं का प्रतीक

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का संविधान 140 करोड़ देशवासियों की आकांक्षाओं, अधिकारों और कर्तव्यों का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की लोकतांत्रिक आत्मा का प्रतीक है। इसी भावना के साथ देश संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराता है।

न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व पर जोर

पीएम मोदी ने कहा कि संविधान की भावना से प्रेरणा लेते हुए देश ऐसे भारत के निर्माण के लिए निरंतर कार्य करेगा, जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्शों के प्रति सदैव समर्पित रहे। उन्होंने कहा कि यही मूल्य देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाते हैं और भविष्य की दिशा तय करते हैं।

लोकतंत्र की रक्षा का दिलाया संकल्प

एक अन्य पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा कि संविधान हत्या दिवस देश को उस दौर की याद दिलाता है, जब भारतीय लोकतंत्र को बुरी तरह प्रभावित किया गया था। उन्होंने कहा कि यह दिन हर नागरिक को लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए हमेशा सजग और प्रतिबद्ध रहने की प्रेरणा देता है। साथ ही उन्होंने आपातकाल का विरोध करने वाली सभी विभूतियों को नमन किया।

दिया स्वतंत्रता का संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश के साथ एक संस्कृत सुभाषित भी साझा किया। उन्होंने लिखा, ‘स्वातन्त्र्यात् सुखमाप्नोति स्वातन्त्र्याल्लभते परम्। स्वातन्त्र्यान्निर्वृत्तिं गच्छेत् स्वातन्त्र्यात् परमं पदम्।’ इस श्लोक का अर्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता से ही मनुष्य सुख प्राप्त करता है, सर्वोच्च उपलब्धियां हासिल करता है और परम लक्ष्य तक पहुंचता है। उन्होंने स्वतंत्रता को लोकतांत्रिक जीवन का सबसे अहम आधार बताया।

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Yogita Tyagi
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योगिता त्यागी एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, मनोरंजन, धर्म और लाइफस्टाइल विषयों में विशेष रुचि है। वर्तमान में वह Mhone News के राजनीतिक, धर्म और मनोरंजन सेक्शन के लिए सक्रिय रूप से लेखन कर रही हैं। डिजिटल मीडिया में तीन वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्होंने अपने करियर में कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों- जैसे दैनिक भास्कर, पंजाब केसरी, इंडिया डेली लाइव और ITV नेटवर्क में योगदान दिया है। योगिता ने गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (GGSIPU) से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है, जिसने उनके डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में गहन, प्रभावशाली और विश्वसनीय लेखन की मजबूत नींव रखी है।
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