भारतीय सेना की मेजर अभिलाषा बराक ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया है। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने उन्हें वर्ष का ‘मिलिट्री जेंडर एडवोकेट’ पुरस्कार प्रदान किया है। लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के दौरान महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा, भागीदारी और सहयोग बढ़ाने में उनके योगदान को देखते हुए यह सम्मान दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनकी उपलब्धि पर बधाई देते हुए इसे भारतीय सेना और देश की बेटियों के लिए प्रेरणादायक बताया है।
PM मोदी ने दी बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर मेजर अभिलाषा बराक को बधाई देते हुए लिखा कि यह सम्मान उनकी उत्कृष्ट सेवा और संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में भारत के ऐतिहासिक योगदान की पहचान है। उन्होंने कहा कि मेजर अभिलाषा की उपलब्धि उन लाखों युवाओं, खासकर बेटियों के लिए प्रेरणा है जो देश और मानवता की सेवा का सपना देखती हैं।
लेबनान में निभा रहीं अहम जिम्मेदारी
मेजर अभिलाषा बराक इस समय लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (UNIFIL) के तहत तैनात हैं। वह वहां एंगेजमेंट टीम कमांडर और जेंडर फोकल पॉइंट के रूप में काम कर रही हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, उन्होंने स्थानीय समुदायों, विशेषकर महिलाओं और लड़कियों के साथ संवाद और सहयोग को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके प्रयासों ने शांति मिशन में लैंगिक समानता और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा दिया। मेजर अभिलाषा बराक पहले भी इतिहास रच चुकी हैं। वह भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट हैं। उनकी यह नई उपलब्धि उनके सैन्य करियर में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में जुड़ गई है।
कैसे चुना जाता है यह पुरस्कार?
संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना विभाग के अनुसार, ‘मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर’ पुरस्कार के लिए हर साल विभिन्न शांति अभियानों में कार्यरत अधिकारियों के नाम प्रस्तावित किए जाते हैं। फोर्स कमांडरों और मिशन प्रमुखों की ओर से भेजे गए नामों में से एक अधिकारी का चयन इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए किया जाता है।
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