केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह(Amit Shah) ने त्रिपुरा के सालबगान क्षेत्र में सीमा सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। यह इलाका भारत-बांग्लादेश सीमा के बेहद नजदीक स्थित है और रणनीतिक दृष्टि से काफी संवेदनशील माना जाता है। बैठक का उद्देश्य सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करना था। सरकारी सूत्रों और पीआईबी के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, इस बैठक में सीमा की मौजूदा स्थिति, सुरक्षा व्यवस्था और स्थानीय प्रशासन की भूमिका की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान गृह मंत्री ने सीमावर्ती क्षेत्रों में हो रहे जमीन के लेन-देन पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे इलाकों में किसी भी प्रकार की संदिग्ध खरीद-बिक्री, निर्माण कार्य या वित्तीय गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाए। इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों को पिछले पांच वर्षों में हुई जमीन से संबंधित सभी रिकॉर्ड की जांच करने के आदेश दिए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि या घुसपैठ से जुड़ा नेटवर्क इन क्षेत्रों में सक्रिय न हो सके।
स्थानीय प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर
अमित शाह ने स्पष्ट किया कि सीमा सुरक्षा केवल सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें स्थानीय प्रशासन की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने जिला प्रशासन के सभी स्तरों के अधिकारियों को एकजुट होकर काम करने के निर्देश दिए।
डीएम, एसपी, पटवारी और पंचायत स्तर तक के अधिकारियों को मिलकर एक मजबूत निगरानी तंत्र विकसित करने को कहा गया है। इस प्रणाली का लक्ष्य एक ऐसा “सुरक्षा कवच” तैयार करना है, जो सीमा से जुड़े हर गतिविधि पर नजर रख सके।
‘फुल प्रूफ बॉर्डर सिक्योरिटी ग्रिड’ की योजना
बैठक में एक मजबूत और बहुस्तरीय सुरक्षा ढांचा तैयार करने पर भी चर्चा हुई, जिसे “फुल प्रूफ बॉर्डर सिक्योरिटी ग्रिड” के रूप में विकसित किया जाएगा। इस मॉडल के तहत सीमा क्षेत्रों में निगरानी को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा ताकि किसी भी प्रकार की अवैध घुसपैठ या तस्करी को रोका जा सके। इस ग्रिड में तकनीक, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों की संयुक्त भूमिका को शामिल किया जाएगा जिससे हर स्तर पर निगरानी संभव हो सके।
‘टोटल टेरिटोरियल डिफेंस’ मॉडल पर काम
बैठक में एक नए सुरक्षा मॉडल “टोटल टेरिटोरियल डिफेंस” पर भी जोर दिया गया। इस मॉडल का उद्देश्य पूरे क्षेत्र में व्यापक स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था स्थापित करना है। इसके तहत न केवल सीमावर्ती सुरक्षा बल बल्कि स्थानीय लोग भी सुरक्षा तंत्र का हिस्सा होंगे।
इस योजना के अंतर्गत स्थानीय नागरिकों को संदिग्ध गतिविधियों की पहचान, अवैध हथियारों की तस्करी और नशीले पदार्थों की आवाजाही जैसी समस्याओं से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। इससे एक ऐसा नेटवर्क तैयार होगा जो जमीन स्तर पर सुरक्षा को और मजबूत बनाएगा।