पंजाब विजिलेंस विभाग के सस्पेंड इंस्पेक्टर ओपी राणा ने CBI की विशेष अदालत में सरेंडर कर दिया है। इसके बाद जांच एजेंसी ने उसे अदालत में पेश कर सात दिन के हिरासत की मांग की। ओपी राणा पर आरोप है कि उसने विजिलेंस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के नाम का इस्तेमाल कर एक सरकारी अधिकारी से लाखों रुपये की रिश्वत और महंगा मोबाइल फोन मांगने की साजिश रची थी।
मई में दर्ज हुआ था केस
CBI ने 11 मई को इस मामले में भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया था। जांच के दौरान पुलिस ने तीन बिचौलियों को गिरफ्तार किया था, जबकि ओपी राणा गिरफ्तारी से बचकर फरार हो गया था। इसके बाद में उसने अलग-अलग अदालतों में जमानत के लिए प्रयास किया, लेकिन राहत नहीं मिलने पर अदालत में सरेंडर कर दिया।
सरकारी अधिकारी से रिश्वत मांगने का आरोप
जांच एजेंसी के अनुसार मामला मलोट में तैनात एक स्टेट टैक्स अधिकारी से जुड़ा है। आरोप है कि शिकायतकर्ता को जांच और कार्रवाई का डर दिखाकर उससे मोटी रकम की मांग की गई थी। हलांकि पहले बड़ी राशि की मांग की गई और बाद में रकम कम कर सौदा तय करने की कोशिश की गई।
CBI ने कोर्ट में रखे गंभीर आरोप
CBI ने अदालत को बताया कि आरोपी पूछताछ के दौरान जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। एजेंसी का कहना है कि उसने अपने मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी। जांच एजेंसी के मुताबिक मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों का पता लगाने के लिए आरोपी से विस्तृत पूछताछ जरूरी है।
डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी
CBI को जांच के दौरान कुछ व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल सामग्री मिली है। इन दस्तावेजों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर एजेंसी पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल थे।
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