राजधानी दिल्ली के बक्करवाला इलाके में देर रात पुलिस और एक वांछित अपराधी के बीच हुई मुठभेड़ के बाद एक कुख्यात आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। दिल्ली पुलिस(Delhi Police) की स्पेशल स्टाफ टीम को लंबे समय से उसकी तलाश थी। पुलिस के अनुसार, आरोपी कई आपराधिक मामलों में शामिल रहा है और हाल के दिनों में हुई कुछ फायरिंग की घटनाओं में भी उसका नाम सामने आया था।
जानकारी के मुताबिक, पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि एक वांछित बदमाश इलाके में आने वाला है। सूचना के आधार पर स्पेशल स्टाफ की टीम ने इलाके में निगरानी बढ़ाई और संदिग्ध की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू कर दी। जब पुलिस ने उसे रोकने का प्रयास किया तो उसने कथित तौर पर भागने की कोशिश की और हालात तेजी से तनावपूर्ण हो गए।
पुलिस ने घेरकर पाया काबू
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोली चलाई। दोनों ओर से कुछ राउंड फायरिंग हुई जिसके बाद पुलिस ने आरोपी को घेरकर काबू में कर लिया। घटना के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए पूरे इलाके को घेर लिया गया था ताकि आम नागरिकों को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान आशीष उर्फ आशीष बक्करवाला के रूप में हुई है। वह इलाके के एक चर्चित ऑटो लिफ्टर मनोज बक्करवाला का बेटा बताया जा रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आशीष के खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं और वह चार मामलों में फरार चल रहा था। इसी वजह से पुलिस उसे लंबे समय से तलाश रही थी।
पहले हत्या के मामले में जा चुका जेल
जांच में यह भी सामने आया है कि आशीष पहले एक हत्या के मामले में जेल जा चुका था। जेल से बाहर आने के बाद वह फिर से अपराध की दुनिया में सक्रिय हो गया। पुलिस का दावा है कि वह कुख्यात हिमांशु भाऊ गैंग से जुड़कर काम कर रहा था और गैंग की गतिविधियों में उसकी भूमिका की भी जांच की जा रही है।
हाल ही में दिल्ली के मुंडका, रनहोला और कंझावला क्षेत्रों में हुई फायरिंग की घटनाओं के बाद पुलिस ने जिन संदिग्धों की सूची तैयार की थी उनमें आशीष का नाम भी शामिल था। इन मामलों में उसकी संभावित भूमिका को लेकर जांच एजेंसियां पहले से जानकारी जुटा रही थीं। गिरफ्तारी के बाद अब इन घटनाओं से जुड़े कई सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
नेटवर्क की जांच जारी
पुलिस ने आरोपी के पास से एक हथियार भी बरामद किया है जिसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि बरामद हथियार का इस्तेमाल किन-किन आपराधिक घटनाओं में किया गया हो सकता है। इसके अलावा आरोपी के अन्य साथियों और उसके नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।