उत्तरी भारत में चल रही तेज़ लू के बीच दिल्ली में इस मौसम का पहला बड़ा हीटस्ट्रोक का मामला सामने आया है। पश्चिम बंगाल का एक 24 वर्षीय छात्र, जो राष्ट्रीय राजधानी की ओर ट्रेन से यात्रा कर रहा था, अत्यधिक गर्मी के संपर्क में आने के कारण बेहोश हो गया और अब ज़िंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है।
इस युवक को दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती कराया गया। बताया जा रहा है कि यात्रा के दौरान उसके शरीर का तापमान खतरनाक रूप से बढ़कर लगभग 105°F तक पहुँच गया था। डॉक्टरों के अनुसार, उसे 20 और 21 मई की दरमियानी रात को बेहोशी की हालत में अस्पताल लाया गया था।
RML अस्पताल में मेडिसिन के डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. अजय चौहान ने पुष्टि कि यह मरीज़ इस साल अस्पताल में आधिकारिक तौर पर रिपोर्ट किया गया हीटस्ट्रोक का पहला मामला है। मेडिकल टीमों ने तुरंत उसकी हालत स्थिर करने के लिए आपातकालीन कूलिंग प्रक्रियाएँ शुरू कर दीं। हालाँकि, मरीज़ अभी भी मेडिसिन वार्ड में गहन निगरानी में है।
यह चिंताजनक घटना ऐसे समय में सामने आई है जब दिल्ली और उत्तर-पश्चिम तथा मध्य भारत के कई हिस्से भीषण लू की चपेट में हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि राजधानी में तापमान 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच सकता है, और आने वाले दिनों में लंबे समय तक अत्यधिक गर्मी पड़ने की उम्मीद है।
इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के मेडिकल विशेषज्ञों ने भी ऐसे मरीज़ों की संख्या में बढ़ोतरी की सूचना दी है जो चक्कर आना, तेज़ सिरदर्द, थकान, मांसपेशियों में ऐंठन, त्वचा पर चकत्ते और अत्यधिक डिहाइड्रेशन की शिकायत कर रहे हैं, ये सभी लंबे समय तक गर्मी के संपर्क में रहने से जुड़े आम चेतावनी संकेत हैं।
डॉक्टर बताते हैं कि ‘हीट एग्जॉशन’ (गर्मी से होने वाली थकावट) तब होता है जब शरीर उच्च तापमान और पसीने के कारण अत्यधिक मात्रा में तरल पदार्थ और नमक खो देता है। यदि समय पर इसका इलाज न किया जाए, तो यह तेज़ी से हीटस्ट्रोक में बदल सकता है, जिसे जानलेवा मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है।
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