देशभर के स्कूलों और संवेदनशील संस्थानों को बम से उड़ाने की धमकियां भेजने वाले एक बड़े साइबर नेटवर्क का खुलासा करते हुए अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस(Punjab Police) ने पश्चिम बंगाल से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई साइबर अपराध और डिजिटल माध्यम से फैलाई जा रही दहशत के खिलाफ बड़ी सफलता मानी जा रही है। जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी फर्जी और गुप्त जीमेल अकाउंट तैयार कर उन्हें बेचने का काम करता था जिनका इस्तेमाल बाद में धमकी भरे ईमेल भेजने के लिए किया जाता था।
आरोपी की हुई पहचान
गिरफ्तार आरोपी की पहचान सौरव बिस्वास उर्फ माइकल के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार वह पेशे से ग्राफिक डिजाइनर है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय कई ऑनलाइन समूहों के जरिए यह अवैध गतिविधियां चला रहा था। शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी इंटरनेट पर ऐसे लोगों के संपर्क में था जो फर्जी डिजिटल पहचान बनाकर उनका इस्तेमाल गैरकानूनी गतिविधियों में करते थे।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, देश के कई स्कूलों और संस्थानों को हाल के महीनों में बम धमकियों वाले ईमेल भेजे गए थे। इन ईमेल्स के कारण कई जगहों पर दहशत का माहौल बन गया था और सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट मोड पर आना पड़ा था। जांच एजेंसियों ने जब इन ईमेल्स की तकनीकी पड़ताल शुरू की तो डिजिटल ट्रेल पश्चिम बंगाल तक पहुंचा। इसके बाद अमृतसर पुलिस की एक विशेष टीम वहां रवाना हुई और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।
ऑनलाइन खरीदे 300 जीमेल अकाउंट
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी ने करीब 300 जीमेल अकाउंट ऑनलाइन खरीदे थे। इनमें से बड़ी संख्या में अकाउंट उसने व्हाट्सएप के जरिए बांग्लादेश में मौजूद एक व्यक्ति को बेच दिए। पुलिस के अनुसार कुल 219 अकाउंट विदेशी संपर्कों को ट्रांसफर किए गए थे। इन खातों का इस्तेमाल बाद में धमकी भरे ईमेल भेजने में किया गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि इन लेन-देन में क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग किया गया। डिजिटल करेंसी के इस्तेमाल की वजह से जांच एजेंसियों को पैसों के स्रोत और ट्रांजेक्शन को ट्रैक करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि अपराधी अब पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम से बचने के लिए क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल तेजी से कर रहे हैं।
गुजरात में भी मामला दर्ज
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी के खिलाफ गुजरात में भी एक मामला दर्ज है और अब विभिन्न राज्यों की एजेंसियां उससे पूछताछ कर रही हैं। जांच इस बात पर भी केंद्रित है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा क्या इसका संबंध किसी अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह से है।