Supreme Court on Stray Dogs: भारत में बढ़ती कुत्तों के काटने की घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कहा कि बच्चों, महिलाओं और आम लोगों पर हो रहे हमलों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने आवारा कुत्तों को लेकर दायर डॉग लवर्स की याचिकाओं को खारिज करते हुए पशु कल्याण बोर्डों द्वारा जारी नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) को बरकरार रखा है। इसमें कोर्ट ने कहा कि खतरनाक कुत्तों को जहरीला इंजेक्शन लगाकर मारा जा सकता है। लोगों की जान की सुरक्षा सबसे ज्यादा जरूरी है।
तीन हिस्सों में सुनाया गया फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपना फैसला तीन हिस्सों में जारी किया। अदालत ने अपने पुराने आदेशों को दोहराते हुए कहा कि खूंखार और रेबीज संक्रमित कुत्तों के लिए अलग शेल्टर होम बनाए जाएं। साथ ही सरकारी संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
नसबंदी और टीकाकरण पर जोर
कोर्ट ने कहा कि आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने के लिए नसबंदी और वैक्सीनेशन बेहद जरूरी है। नगर निगमों और स्थानीय निकायों को निर्देश दिया गया है कि वे कुत्तों को पकड़कर उनका टीकाकरण और स्टरलाइजेशन कराएं। अदालत ने यह भी साफ किया कि सामान्य और स्वस्थ कुत्तों को प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसी इलाके में छोड़ा जाएगा, जहां से उन्हें पकड़ा गया था।
खूंखार और संक्रमित कुत्तों के लिए अलग व्यवस्था
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रेबीज संक्रमित या खतरनाक व्यवहार वाले कुत्तों को दोबारा खुले में नहीं छोड़ा जाएगा। ऐसे कुत्तों को शेल्टर होम में रखा जाएगा। अदालत ने राज्यों और स्थानीय निकायों को निर्देश दिया कि वे संक्रमित और आक्रामक कुत्तों के लिए अलग आश्रय स्थल तैयार करें।
सड़क और गलियों में खाना खिलाने पर रोक
फैसले में अदालत ने खुले स्थानों, सड़कों और गलियों में आवारा कुत्तों को खाना खिलाने पर भी रोक लगाने की बात कही है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि हर शहर में तय फीडिंग जोन बनाए जाएं, जहां उचित व्यवस्था और बोर्ड लगाए जाएं। अदालत का मानना है कि अनियंत्रित तरीके से खाना खिलाने से कई इलाकों में कुत्तों का झुंड आक्रामक हो जाता है।
स्कूल-अस्पताल और रेलवे स्टेशन से हटेंगे कुत्ते
सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, बस अड्डे, रेलवे स्टेशन और खेल परिसरों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और ऐसे स्थानों पर लोगों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने यह भी कहा कि राजस्थान के श्री गंगानगर शहर में ही, एक महीने के अंदर कुत्तों के काटने की 1,084 घटनाएँ सामने आईं। रिपोर्टों के अनुसार, छोटे बच्चों को गंभीर चोटें आईं, जिनमें उनके चेहरों पर गहरे घाव भी शामिल थे। तमिलनाडु में, साल के शुरुआती चार महीनों में ही कुत्तों के काटने की लगभग 200,000 घटनाएँ दर्ज की गईं। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की।
राष्ट्रीय नीति बनाने का निर्देश
अदालत ने केंद्र और संबंधित एजेंसियों को आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए एक समान राष्ट्रीय नीति तैयार करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने माना कि ABC Rules 2001 लागू होने के बावजूद देश में शेल्टर होम और अन्य सुविधाओं का पर्याप्त विकास नहीं हो पाया है। इसी वजह से समस्या लगातार बढ़ रही है।
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