ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने ईद के दौरान सड़कों पर नमाज न पढ़ने की अपील की थी। बरेली में सोमवार को मीडिया से बातचीत करते हुए मौलाना ने कहा कि इस्लाम भी यही सिखाता है कि नमाज ऐसी जगह पढ़ी जाए, जहां शांति बनी रहे और आम लोगों को परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि अगर किसी मस्जिद में भीड़ अधिक हो जाए तो इस्लाम में अलग-अलग जमातों यानी शिफ्ट में नमाज पढ़ने की व्यवस्था पहले से मौजूद है। इससे नमाज भी आराम से हो जाती है और ट्रैफिक या आम लोगों को दिक्कत भी नहीं होती।
“मस्जिद और घर में नमाज पढ़ना बेहतर”
मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि नमाज इबादत का ऐसा तरीका है जिसमें बंदे और खुदा के बीच एकाग्रता और सुकून होना जरूरी है। इसलिए मस्जिद या घर में नमाज पढ़ना ज्यादा बेहतर माना गया है। उन्होंने कहा कि कोई भी मुसलमान जानबूझकर सड़क पर नमाज पढ़ना पसंद नहीं करता। इस्लाम व्यवस्था, सहनशीलता और दूसरों की सुविधा का भी ध्यान रखने की शिक्षा देता है।
बकरीद को लेकर मुस्लिम समाज को दी सलाह
आगामी 28 तारीख को मनाई जाने वाली बकरीद को लेकर भी मौलाना ने समुदाय से कई अपीलें कीं। उन्होंने कहा कि कुर्बानी का धार्मिक कार्यक्रम परंपरा के साथ मनाया जाएगा, लेकिन इसका ध्यान रखा जाए कि यह सार्वजनिक जगहों पर न हो। उन्होंने लोगों से कहा कि कुर्बानी केवल निजी स्थानों या घरों के अंदर की जाए और जहां यह प्रक्रिया हो रही हो, उस जगह को चारों तरफ से ढक दिया जाए ताकि बाहर किसी को असुविधा या आपत्ति न हो।
साफ-सफाई और कानून व्यवस्था पर भी जोर
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि सरकार साफ-सफाई और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास करती है और समाज को भी इसमें सहयोग करना चाहिए। उन्होंने अपील की कि कुर्बानी के बाद बचे हुए अवशेषों को खुले में फेंकने के बजाय उचित तरीके से जमीन में दफन किया जाए, ताकि किसी तरह की गंदगी या विवाद की स्थिति पैदा न हो।
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