करीब तीन दशक पहले बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर जापान(Japan) पहुंचे मनीष कुमार ने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन उन्हें अपना सबकुछ छोड़कर वापस लौटने की नौबत आ जाएगी। सैतामा प्रांत में भारतीय भोजन का रेस्टोरेंट चलाने वाले मनीष आज गहरे संकट में हैं। जापान सरकार ने उनका बिजनेस मैनेजर वीजा बढ़ाने से इनकार कर दिया है, जिसके बाद उनके परिवार का भविष्य अनिश्चितता में घिर गया है।
हाल ही में टोक्यो में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान मनीष हजारों लोगों के सामने अपना दर्द बयां करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि पिछले 18 साल से वह जापान में अपना रेस्टोरेंट चला रहे हैं और इससे पहले भी लंबे समय से वहीं रह रहे हैं। उन्होंने मेहनत करके कारोबार खड़ा किया घर खरीदा और परिवार बसाया लेकिन अब अचानक बदलते नियमों ने उनकी जिंदगी को मुश्किल में डाल दिया है।
जापान में ही पले बढ़े बच्चे
मनीष कहते हैं कि उनके बच्चे जापान में ही पैदा हुए और वहीं बड़े हुए हैं। वे जापानी भाषा में ही सहज हैं और उनका पूरा सामाजिक दायरा भी जापान में ही है। ऐसे में भारत लौटने की स्थिति परिवार के लिए बेहद कठिन हो सकती है। उनका कहना है कि उन्होंने कभी कोई नियम नहीं तोड़ा फिर भी उन्हें देश छोड़ने के लिए कहा जा रहा है।
दरअसल, जापान ने पिछले साल बिजनेस मैनेजर वीजा से जुड़े नियमों को काफी सख्त कर दिया था। सरकार का तर्क है कि कुछ लोग फर्जी कारोबार दिखाकर लंबे समय तक देश में रहने की कोशिश कर रहे थे इसलिए व्यवस्था में बदलाव जरूरी था। लेकिन इन नए नियमों का असर उन छोटे विदेशी कारोबारियों पर भी पड़ रहा है, जो वर्षों से ईमानदारी से अपना व्यवसाय चला रहे हैं।
वीजा नियमों में हुआ बदलाव
नई नीति के तहत बिजनेस वीजा के लिए न्यूनतम निवेश राशि को कई गुना बढ़ा दिया गया है। इसके अलावा स्थानीय कर्मचारी रखना, जापानी भाषा का ज्ञान, विस्तृत बिजनेस प्लान और टैक्स रिकॉर्ड जैसी शर्तों को भी पहले से ज्यादा कड़ा कर दिया गया है। इन बदलावों के बाद वीजा आवेदनों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
मनीष कुमार का मामला अब जापान में रह रहे छोटे विदेशी कारोबारियों के बीच चिंता का बड़ा विषय बन चुका है। कई लोगों को डर है कि अगर नियम इसी तरह सख्त रहे तो वर्षों की मेहनत से खड़े किए गए उनके कारोबार और परिवार दोनों खतरे में पड़ सकते हैं।