उत्तराखंड सरकार ऋषिकेश से नीलकंठ महादेव मंदिर तक बनने वाली रोपवे(Rishikesh-Neelkanth Ropeway) परियोजना को केवल धार्मिक पर्यटन तक सीमित नहीं रखना चाहती बल्कि इसे पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक विकास के संतुलन का उदाहरण बनाने की तैयारी में है। लगभग 450 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना में वन्यजीवों की सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता दी गई है। यही वजह है कि इसे देश के पहले “ग्रीन रोपवे कॉरिडोर” के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है।
राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) ने परियोजना को मंजूरी देते समय साफ कहा है कि निर्माण कार्य के दौरान वन्यजीवों के प्राकृतिक मार्ग प्रभावित नहीं होने चाहिए। इसके तहत सरकार दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे की तर्ज पर एक विशेष ग्रीन कॉरिडोर तैयार करेगी जिससे हाथी, तेंदुआ, हिरण और अन्य जंगली जानवर बिना किसी बाधा के अपने पारंपरिक रास्तों से गुजर सकें।
अब श्रद्धालु 15 मिनट में पहुंचेंगे नीलकंठ
करीब 6.5 किलोमीटर लंबे इस रोपवे के बनने के बाद श्रद्धालु ऋषिकेश से नीलकंठ महादेव मंदिर तक केवल 15 मिनट में पहुंच सकेंगे। वर्तमान में सड़क मार्ग से यह दूरी लगभग 30 किलोमीटर है जबकि कई श्रद्धालु 9 किलोमीटर लंबा पैदल ट्रैक भी तय करते हैं। रोपवे शुरू होने के बाद यात्रा तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक हो जाएगी।
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, रोपवे का शुरुआती स्टेशन ऋषिकेश के तपोवन क्षेत्र में बनाया जाएगा और इसका मार्ग त्रिवेणीघाट होते हुए नीलकंठ महादेव मंदिर तक जाएगा। यह पूरा क्षेत्र राजाजी टाइगर रिजर्व और गंगा के आसपास फैले घने जंगलों से होकर गुजरता है, इसलिए परियोजना के डिजाइन में पर्यावरणीय पहलुओं का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
क्यों शुरु हुई परियोजना ?
यह इलाका एशियाई हाथियों के मूवमेंट के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है। इसके अलावा यहां तेंदुआ, सांभर, चीतल, काकड़, जंगली सूअर, नीलगाय, घुरल, लंगूर और बंदरों की अच्छी-खासी संख्या मौजूद है। कुछ हिस्सों में बाघों की गतिविधियां भी देखी गई हैं। इसी जैव विविधता को सुरक्षित रखने के लिए रोपवे परियोजना में आधुनिक तकनीक और पर्यावरण अनुकूल उपायों को शामिल किया जा रहा है।
परियोजना को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद जिला प्रशासन ने इसके लिए एक हेक्टेयर भूमि उपलब्ध करा दी है। अब भारतीय वन्यजीव संस्थान की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि यह रोपवे भविष्य में धार्मिक पर्यटन, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और वन्यजीव संरक्षण का अनोखा उदाहरण बनेगा।