प्रयागराज में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने लेंसकार्ट को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी, जिसके बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। उन्होंने मंच से कंपनी की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यहां कोई तिलक लगा के नहीं आ सकता, मंगलसूत्र पहन के नहीं आ सकता, सिंदूर लगा के नहीं आ सकता. इससे अच्छा अपनी कंपनी लाहौर में खोल लो।
कंपनी पर लगाए आरोप
कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि लेंसकार्ट अपने कर्मचारियों को तिलक, सिंदूर या मंगलसूत्र जैसे धार्मिक प्रतीक पहनकर आने से रोकता है। इस पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी कंपनियों को भारत में नहीं, बल्कि कहीं और कारोबार करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की नीतियां हिंदू समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाती हैं और ऐसे संस्थानों का विरोध होना चाहिए।
सोशल मीडिया से शुरू हुआ विवाद
दरअसल, यह पूरा मामला पॉलिसी डॉक्यूमेंट के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सामने आया था। इसमें दावा किया गया था कि कंपनी ने कर्मचारियों के धार्मिक प्रतीकों पर कुछ प्रतिबंध लगाए हैं। हालांकि, विवाद बढ़ने पर लेंसकार्ट के सह-संस्थापक पीयूष बंसल ने सफाई दी थी कि यह दस्तावेज पुराना और भ्रामक है, जिसे पहले ही हटा दिया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि कंपनी किसी भी तरह का धार्मिक भेदभाव नहीं करती और कर्मचारियों को अपनी आस्था के अनुसार पहनावे की स्वतंत्रता है।
बहिष्कार की मांग तेज
इसके बावजूद मामला शांत नहीं हुआ है। सोशल मीडिया पर कई लोग कंपनी के खिलाफ नाराजगी जता रहे हैं और बहिष्कार की मांग कर रहे हैं। कुछ जगहों पर विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं, जहां लोगों ने स्टोर्स के बाहर नारेबाजी की गई। फिलहाल यह विवाद धार्मिक भावनाओं, कॉर्पोरेट नीतियों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे मुद्दों को लेकर बहस का विषय बन गया है।
Read More

