अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में चल रही अहम शांति वार्ता विफल हो गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच किसी भी समझौते पर सहमति नहीं बन सकी।
वार्ता हुई विफल
जेडी वेंस ने कहा, “दुर्भाग्यपूर्ण है कि बातचीत के बावजूद कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया।” इससे पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
चीन की भूमिका पर विवाद
इसी बीच अमेरिकी खुफिया सूत्रों ने दावा किया है कि चीन आने वाले हफ्तों में ईरान को एयर डिफेंस सिस्टम देने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये सिस्टम कंधे से दागे जाने वाले एंटी-एयर मिसाइल (MANPADS) हो सकते हैं, जो कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकते हैं।
ट्रंप की सख्त चेतावनी
चीन की इस योजना पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि अगर बीजिंग ने ईरान को सैन्य मदद दी तो उसे “गंभीर परिणाम” भुगतने होंगे। खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन इन हथियारों की आपूर्ति सीधे न करके तीसरे देशों के रास्ते भेजने की योजना बना सकता है, ताकि उनकी असली उत्पत्ति छिपाई जा सके।
चीन ने आरोपों को किया खारिज
वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। प्रवक्ता ने कहा, “चीन ने इस संघर्ष में किसी भी पक्ष को हथियार नहीं दिए हैं। ये आरोप बेबुनियाद हैं।” उन्होंने अमेरिका से “तनाव बढ़ाने वाली बयानबाजी से बचने” की अपील भी की। सूत्रों का कहना है कि ईरान इस अस्थायी संघर्षविराम का इस्तेमाल अपने सैन्य भंडार को मजबूत करने के लिए कर सकता है। अगर ऐसा हुआ तो क्षेत्र में फिर से टकराव की स्थिति बन सकती है।
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