Fake Trading App Scam: देश में फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स के जरिए बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड को लेकर सरकार ने सख्त चेतावनी जारी की है। एडवायजरी में कहा गया है कि ठग लोग निवेश पर ज्यादा रिटर्न का लालच देकर आम लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं और बाद में उनका पैसा हड़प लेते हैं। सरकार के अनुसार, ये ऐप्स दिखने में बिल्कुल असली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स जैसे लगते हैं, जिससे लोगों के लिए असली और नकली में फर्क कर पाना मुश्किल हो जाता है।
कैसे काम करता है यह स्कैम?
एडवायजरी के मुताबिक, फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स का इंटरफेस और ब्रांडिंग बड़े और भरोसेमंद प्लेटफॉर्म्स की तरह बनाई जाती है। इन ऐप्स को सोशल मीडिया विज्ञापनों, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स और संदिग्ध लिंक के जरिए डाउनलोड कराया जाता है। एक बार ऐप इंस्टॉल होने के बाद यूजर्स से शेयर बाजार या अन्य निवेश के नाम पर पैसे जमा कराए जाते हैं। लेकिन यह पैसा किसी निवेश में न जाकर सीधे ठगों के खातों में चला जाता है। कई मामलों में यूजर्स को फर्जी मुनाफा दिखाने के लिए नकली डैशबोर्ड भी तैयार किए जाते हैं, जिससे लोग लालच में आकर और ज्यादा पैसा निवेश करते रहते हैं।
इन तीन बातों का रखें खास ध्यान
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सरकार ने ऐसे स्कैम से बचने के लिए कुछ अहम सावधानियां बरतने की सलाह दी है। सबसे पहले, किसी भी निवेश से पहले बैंक डिटेल्स को आधिकारिक स्रोत से जरूर जांचें, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पैसा सही जगह जा रहा है।
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दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि भुगतान करते समय UPI हैंडल या पेमेंट गेटवे की प्रामाणिकता जरूर जांचें, क्योंकि फर्जी ऐप्स अक्सर संदिग्ध पेमेंट डिटेल्स का इस्तेमाल करती हैं।
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तीसरी और जरूरी सावधानी यह है कि किसी भी ट्रेडिंग ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसके वेरिफिकेशन लेबल या सर्टिफिकेशन को जरूर देखें। इससे यह पहचानने में मदद मिलती है कि प्लेटफॉर्म असली और सुरक्षित है या नहीं।
ठगी का शिकार होने पर क्या करें?
अगर कोई व्यक्ति इस तरह के वित्तीय स्कैम का शिकार हो जाता है, तो उसे तुरंत शिकायत दर्ज करनी चाहिए। इसके लिए नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा, सरकार के ऑनलाइन साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराकर कार्रवाई की जा सकती है। समय पर शिकायत करने से नुकसान को कम किया जा सकता है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई संभव होती है।
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