उत्तर प्रदेश में जमीन और संपत्ति से जुड़े कार्यों को अधिक सरल, पारदर्शी और नागरिकों के अनुकूल बनाने की दिशा में राज्य सरकार(Yogi government) ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि उप-निबंधक कार्यालयों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाए। उनका उद्देश्य है कि ये कार्यालय केवल सरकारी दफ्तर न रहकर ऐसी सेवा इकाइयों के रूप में विकसित हों जहां लोगों को कम समय में बेहतर सुविधाएं मिल सकें। CM योगी ने कहा कि इन कार्यालयों का विकास पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तर्ज पर किया जाना चाहिए, ताकि नागरिकों को व्यवस्थित और सुगम सेवाएं उपलब्ध हो सकें।
पंजीकरण में दर्ज हुई उल्लेखनीय वृद्धि
बैठक के दौरान विभाग के प्रदर्शन की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग के राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विभाग की आय जहां वर्ष 2016-17 में लगभग 11 हजार करोड़ रुपये थी, वहीं हाल के वर्षों में यह बढ़कर 32 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गई है।
इसी तरह पंजीकृत दस्तावेजों की संख्या में भी बड़ा इजाफा हुआ है। यह बढ़ती गतिविधियां राज्य में आर्थिक विकास और संपत्ति लेन-देन में बढ़ती भागीदारी को दर्शाती हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ सेवाओं की गुणवत्ता और नागरिक संतुष्टि पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाए।
डिजिटल तकनीक से बदलेगी रजिस्ट्री प्रक्रिया
राज्य सरकार अब रजिस्ट्री प्रक्रिया को पूरी तरह तकनीक आधारित बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने पेपरलेस रजिस्ट्रेशन को बढ़ावा देने, पुराने अभिलेखों के डिजिटलीकरण और संपत्तियों की जियो-टैगिंग जैसे उपायों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। इसके अलावा आधार आधारित प्रमाणीकरण, बायोमेट्रिक पहचान और आईरिस स्कैनिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को भी प्रणाली में शामिल करने की योजना है।
सरकार का मानना है कि इन उपायों से फर्जीवाड़े की संभावना कम होगी और प्रक्रिया अधिक सुरक्षित बनेगी। रजिस्ट्री व्यवस्था को अधिक स्मार्ट और प्रभावी बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित तकनीकों के उपयोग पर भी जोर दिया गया है। AI की मदद से दस्तावेजों की जांच, डेटा विश्लेषण और संभावित अनियमितताओं की पहचान आसान हो सकेगी।
संपत्तियों के मूल्यांकन में आएगी पारदर्शिता
भूमि और संपत्ति के मूल्य निर्धारण को लेकर अक्सर विवाद सामने आते हैं। इन्हें कम करने के लिए सरकार मानकीकृत मूल्यांकन प्रणाली विकसित करने पर विचार कर रही है। इसका उद्देश्य संपत्तियों का मूल्य वास्तविक बाजार दरों के अनुरूप तय करना है। यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो संपत्ति खरीदने और बेचने वाले दोनों पक्षों को लाभ मिलेगा और स्टाम्प शुल्क से जुड़ी विसंगतियों पर भी नियंत्रण पाया जा सकेगा।
CM योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश तेजी से निवेश आकर्षित करने वाले राज्यों में शामिल हो रहा है। ऐसे में कॉरपोरेट पुनर्गठन, कंपनियों के विलय-विभाजन, एलएलपी और अन्य व्यावसायिक प्रक्रियाओं से जुड़े नियमों को भी समयानुकूल बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अन्य राज्यों की सफल व्यवस्थाओं का अध्ययन कर ऐसा कानूनी ढांचा तैयार किया जाए जो उद्योगों और निवेशकों के लिए अधिक सुविधाजनक हो।