पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में हालात एक बार फिर हिंसक हो गए हैं। राजनीतिक अधिकारों और विधानसभा में आरक्षित सीटों के मुद्दे को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई, जबकि 70 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों में प्रदर्शनकारी और सुरक्षा कर्मी दोनों शामिल हैं। यह हिंसा रावलाकोट और आसपास के इलाकों में उस समय भड़की जब प्रतिबंधित संगठन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया। संगठन लंबे समय से क्षेत्र में अधिक राजनीतिक अधिकारों और विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को समाप्त करने की मांग कर रहा है।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की सर्वोच्च अदालत ने फैसला सुनाया कि कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटें संवैधानिक रूप से संरक्षित हैं और इन्हें बिना संवैधानिक संशोधन के समाप्त नहीं किया जा सकता। अदालत के इस फैसले के बाद विरोध तेज हो गया। JAAC ने इसे स्थानीय जनता के अधिकारों के खिलाफ बताते हुए बड़े आंदोलन की घोषणा की थी। प्रदर्शन के दौरान हालात तब बिगड़ गए जब सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश की। अधिकारियों का दावा है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर गोलीबारी और पेट्रोल बमों से हमला किया, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई। वहीं प्रदर्शनकारी नेताओं का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर अत्यधिक बल प्रयोग किया और निर्दोष लोगों को निशाना बनाया।
70 से ज्यादा घायल, कई गिरफ्तार
स्थानीय प्रशासन के अनुसार हिंसा में 70 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें पुलिसकर्मी और आम नागरिक शामिल हैं। कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया है। क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे प्रदर्शन
JAAC पिछले कुछ वर्षों से महंगाई, बिजली दरों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों को लेकर आंदोलन करता रहा है। इससे पहले भी संगठन के नेतृत्व में हुए कई प्रदर्शनों में हिंसा और सुरक्षा बलों के साथ टकराव की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनावों और आरक्षित सीटों के मुद्दे को लेकर PoK में राजनीतिक तनाव और बढ़ सकता है। विरोध प्रदर्शन के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और प्रशासन किसी भी नई अशांति को रोकने के लिए सतर्क है।

