भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रही सीजफायर वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने साफ कहा कि इजरायल पाकिस्तान को एक “भरोसेमंद खिलाड़ी” नहीं मानता। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि अमेरिका ने अपने रणनीतिक कारणों से पाकिस्तान की मदद लेने का फैसला किया होगा।
अमेरिका के फैसले पर इजरायल की अलग राय
न्यूज एजेंसी से बातचीत में अजार ने कहा कि अमेरिका की अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताएं हो सकती हैं, लेकिन इजरायल का दृष्टिकोण अलग है। उन्होंने इस पहल की तुलना उस समय से की, जब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने कतर और तुर्की जैसे देशों के साथ मिलकर गाजा में युद्धविराम की कोशिश की थी, जिसमें हमास से जुड़े समझौते भी शामिल थे।
लेबनान मुद्दे को बताया अलग
राजदूत ने स्पष्ट किया कि ईरान के साथ युद्धविराम और लेबनान में चल रहा संघर्ष दो अलग-अलग विषय हैं। उनके अनुसार, इजरायल का मुख्य उद्देश्य दक्षिणी लेबनान से हिजबुल्लाह के आतंकवादी ढांचे को पूरी तरह खत्म करना है, और यह जिम्मेदारी लेबनानी सरकार की भी है।
हिजबुल्लाह के खिलाफ सख्त रुख
अजार ने कहा कि इजरायल अपनी उत्तरी सीमा की सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर है। उन्होंने बताया कि हाल ही में इजरायली वायुसेना ने बड़े अभियान के तहत लेबनान में 250 से अधिक हिजबुल्लाह आतंकियों को मार गिराया है। उन्होंने दोहराया कि लितानी नदी के दक्षिण में हिजबुल्लाह की मौजूदगी किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी और उनका निरस्त्रीकरण जरूरी है।
सीजफायर का समर्थन, लेकिन शर्तों के साथ
ईरान के साथ चल रही सीजफायर वार्ता पर अजार ने कहा कि इजरायल इस पहल का समर्थन करता है, बशर्ते यह बातचीत ठोस नतीजों तक पहुंचे। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह प्रक्रिया ईरान के परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल उत्पादन जैसे बड़े खतरों को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।
अमेरिका की भूमिका को बताया अहम
राजदूत ने कहा कि अमेरिका के नेतृत्व में हो रही यह बातचीत एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस पहल से क्षेत्र में स्थिरता आएगी, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि इजरायल अपनी सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं करेगा।
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