अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों के युद्धविराम की घोषणा का असर वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखा। बुधवार (8 अप्रैल 2026) को कच्चे तेल के वायदा भाव में तेज गिरावट आई और कीमत करीब 18% लुढ़ककर 8,775 रुपये प्रति बैरल तक पहुंच गई। इस बीच, ईरान पर से अमेरिकी प्रतिबंध हटने के बाद भारत ने लगभग सात साल बाद तेहरान से फिर कच्चे तेल का आयात शुरू करने की तैयारी कर ली है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक बड़ा तेल टैंकर(Iranian Oil) जो पहले चीन की ओर जा रहा था, अब अपना रुख बदलकर भारत के पूर्वी तट की ओर बढ़ रहा है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि वैश्विक सप्लाई चेन धीरे-धीरे स्थिर हो रही है और ईरान से तेल आपूर्ति के रास्ते फिर खुलने लगे हैं। लंदन स्टॉक एक्सचेंज ग्रुप (LSEG) और केप्लर के शिपिंग डेटा के अनुसार ‘जया’ नाम का टैंकर, जिस पर कुराकाओ का झंडा लगा है, अब भारत की ओर बढ़ रहा है। पहले यह जहाज चीन में तेल उतारने वाला था, लेकिन अब इसका मार्ग बदल दिया गया है।
सहमति के बाद टली सैन्य कार्रवाई
सरकारी कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के आंकड़ों से पता चलता है कि इस टैंकर में मौजूद कच्चा तेल भारत के लिए खरीदा जा चुका है और इसके सप्ताह के अंत तक पहुंचने की संभावना है। शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार यह जहाज पहले दक्षिण-पूर्व एशिया के जलक्षेत्र में था, जहां से इसे चीन जाना था, लेकिन बाद में इसे भारत की ओर मोड़ दिया गया। पेट्रोलियम मंत्रालय ने भी हाल ही में बताया था कि मध्य पूर्व में तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने की आशंका के चलते भारतीय रिफाइनरियों ने ईरानी तेल की खरीद बढ़ाई थी।
वहीं, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और भू-राजनीतिक जोखिम घटने से कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति बनने के बाद प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल टाल दिया गया है। इस समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर भी सहमति बनी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने भी संकेत दिए हैं कि इस अवधि में होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही जारी रहेगी, जिससे तेल आपूर्ति में बाधा की आशंकाएं कम हो गई हैं।