दिल्ली पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो 2,000 से अधिक शिकायतों और 300 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी से जुड़ा है। पुलिस ने गिरोह के सरगना समेत कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह नेटवर्क कई राज्यों में सक्रिय था और इसके तार विदेशों, खासकर कंबोडिया से जुड़े पाए गए हैं।
फर्जी कंपनियां और सैकड़ों बैंक खाते इस्तेमाल
जांच में सामने आया कि गिरोह ने 100 से अधिक फर्जी कंपनियां बनाकर 260 से ज्यादा बैंक खातों का इस्तेमाल किया। इन खातों के जरिए ठगी की रकम को इधर-उधर घुमाकर असली स्रोत छिपाया जाता था। कुल 2,567 शिकायतें इस नेटवर्क से जुड़ी पाई गई हैं।
कोलकाता एयरपोर्ट से सरगना गिरफ्तार
मुख्य आरोपी करण कजारिया को लुकआउट सर्कुलर जारी होने के बाद 3 अप्रैल को कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया। उसे दिल्ली लाकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस के मुताबिक, वह विदेशी ऑपरेटर्स और भारतीय नेटवर्क के बीच मुख्य कड़ी था।
निवेश के नाम पर लोगों को बनाया शिकार
यह मामला एक पीड़ित की शिकायत से सामने आया, जिसे फर्जी निवेश योजना के जरिए 31.45 लाख रुपये का चूना लगाया गया। आरोपियों ने उसे एक नकली ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड करवा कर निवेश करने के लिए प्रेरित किया, लेकिन पैसे निकालने के समय ऐप काम करना बंद कर गया।
क्रिप्टो और एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल
पुलिस के अनुसार, गिरोह क्रिप्टोकरेंसी के जरिए पैसों का लेन-देन करता था और एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से संवेदनशील जानकारी साझा करता था। फर्जी बैंक खातों (म्यूल अकाउंट) और बिचौलियों के जरिए पूरी ठगी को अंजाम दिया जाता था।
4-5 साल से सक्रिय था गिरोह
जांच में पता चला है कि यह गिरोह पिछले 4-5 वर्षों से सक्रिय था और देशभर में बड़े पैमाने पर लोगों को निशाना बना रहा था। आरोपी विदेश यात्रा कर नेटवर्क को मजबूत करते थे और गिरफ्तारी से बचने की कोशिश करते थे। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान 48 मोबाइल फोन, 258 सिम कार्ड, कई एटीएम कार्ड, चेकबुक, 4 लैपटॉप और बैंकिंग दस्तावेज बरामद किए हैं। इसके अलावा 19 लाख रुपये नकद भी जब्त किए गए हैं। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
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