देश की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायु सेना के लिए अत्याधुनिक माउंटेन रडार खरीदने का फैसला किया है। करीब 1950 करोड़ रुपये की इस डील के तहत भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के साथ समझौता किया गया है, जिसमें दो उन्नत रडार सिस्टम शामिल हैं। ये रडार पूरी तरह स्वदेशी हैं और इन्हें डीआरडीओ ने भारतीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया है।
सटीक निगरानी करने में सक्षम
इन माउंटेन रडार को ‘पहाड़ों की आंख’ कहा जाता है, क्योंकि ये दुर्गम और ऊंचाई वाले इलाकों में भी बेहद सटीक निगरानी करने में सक्षम हैं। माइनस 30 डिग्री से लेकर 55 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान और कम ऑक्सीजन वाले माहौल में भी ये बिना रुके काम कर सकते हैं। खास बात यह है कि ये दुश्मन के ड्रोन, कम ऊंचाई पर उड़ने वाले स्टील्थ फाइटर जेट और पहाड़ों की ओट में छिपकर आने वाले खतरों को भी पहचान लेते हैं।
सेना को जवाबी कार्रवाई में मिलेगी तेजी
पहाड़ी इलाकों, खासकर एलएसी पर, जहां चीन छोटे ड्रोन और लो-फ्लाइंग एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल करता है, वहां ये राडार गेम चेंजर साबित होंगे। वहीं एलओसी पर भी इनकी अहम भूमिका रहेगी। जैसे ही सीमा पार से कोई मोर्टार या तोप दागी जाती है, ये तुरंत उसकी लोकेशन का पता लगा लेते हैं, जिससे भारतीय सेना को जवाबी कार्रवाई में तेजी मिलती है।
इसके अलावा, पाकिस्तान की ओर से ड्रोन के जरिए होने वाली हथियार और ड्रग्स की तस्करी पर भी ये रडार प्रभावी रोक लगा सकेंगे। कुल मिलाकर, यह कदम न सिर्फ भारत की एयर डिफेंस क्षमता को मजबूत करेगा, बल्कि विदेशी तकनीक पर निर्भरता भी कम करेगा।
READ MORE: तेल की कंगाली से जूझता पाकिस्तान, विदेशी एयरलाइन्स अपने देश से फ्यूल लाने को मजबूर

