ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म फ्लिपकार्ट को अपनी सेवा में कमी और पॉलिसी के उल्लंघन के चलते दिल्ली की उपभोक्ता अदालत का सामना करना पड़ा। ‘डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल फोरम-III (वेस्ट)’ ने कंपनी को कड़ी फटकार लगाते हुए पीड़ित ग्राहक को रिफंड और मुआवजा देने का आदेश सुनाया।
अदालत ने फ्लिपकार्ट को फटकारा
यह मामला साल 2020 का है। विकासपुरी, दिल्ली के निवासी राजीव महाय ने सितंबर 2020 में फ्लिपकार्ट से 10,999 रुपये में ‘Lenovo Tab M10′ खरीदा। 27 सितंबर को डिलीवरी पर पता चला कि टैबलेट का डिस्प्ले खराब है और काम नहीं कर रहा। ग्राहक ने तुरंत शिकायत दर्ज कराई, और फ्लिपकार्ट का टेक्नीशियन घर आकर खराबी की पुष्टि भी कर चुका था। इसके बावजूद फ्लिपकार्ट ने अपनी ’30 दिन की रिप्लेसमेंट गारंटी’ का पालन नहीं किया और डिवाइस वापस उठाने (Reverse Pick-up) की प्रक्रिया पूरी नहीं की।
सुनवाई के दौरान फ्लिपकार्ट ने खुद को केवल ‘इंटरमीडियरी’ बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की और दावा किया कि टैबलेट थर्ड-पार्टी सेलर ने बेचा है और खराबी ग्राहक की गलती से हुई। हालांकि, अध्यक्ष सोनिका मेहरोत्रा की अध्यक्षता वाले फोरम ने इन दलीलों को खारिज कर दिया और पाया कि फ्लिपकार्ट ने अपनी ही नीतियों का उल्लंघन किया।
अदालत ने 12 मार्च को फैसला सुनाते हुए फ्लिपकार्ट को दोषी पाया और निम्न निर्देश दिए:
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रिफंड: ग्राहक को टैबलेट की पूरी कीमत 10,999 रुपये वापस की जाए।
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मुआवजा: मानसिक परेशानी के लिए 5,000 रुपये का जुर्माना।
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कानूनी खर्च:मुकदमेबाजी के लिए 4,000 रुपये अलग से दिए जाएं।
फ्लिपकार्ट को 30 दिनों के भीतर इन सभी आदेशों का पालन करना होगा।
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