इज़रायल के साथ मिलकर ईरान पर हमले(Middle East crisis)के करीब 25 दिन बाद अब अमेरिका की ओर से नरमी के संकेत दिखाई दे रहे हैं। पहले इस संघर्ष में जीत का दावा करने वाले डोनाल्ड ट्रंप ने अब यह इशारा दिया है कि ईरान के साथ बातचीत जारी है और हालात को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने की कोशिश हो रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन ने ईरान को 15 बिंदुओं वाला एक युद्धविराम प्रस्ताव दिया है। इस योजना में एक महीने के सीजफायर का सुझाव भी शामिल है। जानकारी के मुताबिक, यह प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए ईरानी नेतृत्व तक पहुंचाया गया। इससे पहले पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की पेशकश की थी, जिसे वॉशिंगटन ने स्वीकार कर लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह प्रस्ताव ईरान को सौंपा जा चुका है।
हालांकि इस 15-सूत्रीय योजना का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं हुआ है, लेकिन जो बातें सामने आई हैं, उनसे पता चलता है कि इसका फोकस तीन प्रमुख मुद्दों पर है। सबसे अहम मांग ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने की है। इसमें यूरेनियम संवर्धन पर रोक, नतान्ज, फोर्डो और इस्फहान जैसी प्रमुख परमाणु सुविधाओं को बंद करना, और अंतरराष्ट्रीय निगरानी को मंजूरी देना शामिल है।
क्या चाहता है अमेरिका ?
अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को सीमित करे, ताकि उसकी सैन्य ताकत पर भी नियंत्रण रखा जा सके। एक और बड़ी शर्त यह है कि ईरान मिडिल ईस्ट में अपने प्रभाव को कम करे-खासकर हिजबुल्लाह और हूती जैसे समूहों को वित्तीय और सैन्य समर्थन देना बंद करे।
साथ ही, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खुला रखने और तय समयसीमा के भीतर सीजफायर लागू करने की बात भी प्रस्ताव में शामिल है। इन शर्तों के बदले अमेरिका ईरान पर लगे प्रतिबंधों में राहत देने की बात कर रहा है।
नई योजना पर सहमति बन पाना मुश्किल
जहां तक ईरान की प्रतिक्रिया का सवाल है, उसने अब तक इस तरह की किसी भी बातचीत को लेकर खास उत्साह नहीं दिखाया है। तेहरान का मानना है कि यह प्रस्ताव किसी नई पहल से ज्यादा पहले की असफल परमाणु वार्ताओं का ही बदला हुआ रूप है। ईरान यह भी तर्क देता रहा है कि पिछली बातचीत के दौरान ही अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई की थी, जिससे भरोसे की कमी पैदा हो गई है। ऐसे में इस नई योजना पर सहमति बनना फिलहाल मुश्किल नजर आ रहा है।