केंद्र सरकार ने देश में बुनियादी ढांचे के विस्तार को तेज करने के लिए एक और अहम निर्णय लिया है। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में रेलवे, मेट्रो और विमानन क्षेत्र से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इन योजनाओं पर कुल 12,236 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके साथ ही बिजली क्षेत्र में सुधारों को लेकर नीतिगत फैसले लिए गए और केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी गई।
रेलवे परियोजनाओं को बड़ी सौगात
रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से तीन प्रमुख परियोजनाओं को हरी झंडी मिली है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी कि 5,236 करोड़ रुपये की लागत से गोंदिया-जबलपुर रेलखंड का दोहरीकरण किया जाएगा। इसके अलावा पुनारख-किउल सेक्शन में तीसरी और चौथी लाइन बिछाने के लिए 2,668 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।
गम्हरिया-चांडिल रेलखंड पर भी तीसरी और चौथी लाइन के निर्माण को स्वीकृति मिली है, जिस पर 1,168 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इन परियोजनाओं से मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुगम होगी तथा पूर्वी और मध्य भारत के औद्योगिक क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलेगा।
एविएशन और मेट्रो विस्तार
विमानन क्षेत्र में भी निवेश को मंजूरी दी गई है। श्रीनगर में आधुनिक सुविधाओं से युक्त नया इंटीग्रेटेड टर्मिनल 1,667 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा। वहीं अहमदाबाद मेट्रो परियोजना के फेज-2B के विस्तार के लिए 1,067 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिससे शहरी परिवहन व्यवस्था और सुदृढ़ होगी।
किसानों को राहत, कच्चे जूट पर MSP
मंत्रिमंडल ने कच्चे जूट के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को भी मंजूरी दी है। इस फैसले से लगभग 430 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय प्रभाव पड़ेगा और जूट किसानों की आय में बढ़ोतरी की उम्मीद है।
‘सेवा तीर्थ’ में पहली कैबिनेट बैठक
यह बैठक नए प्रधानमंत्री कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में आयोजित की गई। मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे “नए भारत के निर्माण का प्रतीक” बताया। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश काल के अस्थायी बैरकों की जगह बने इस परिसर में शासन की सक्रिय व्यवस्था स्थापित होना परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
केरल अब ‘केरलम’
बैठक में केरल राज्य का नाम आधिकारिक रूप से ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। यह निर्णय 24 जून 2024 को केरल विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव के बाद लिया गया है, जिसमें संविधान की प्रथम अनुसूची में संशोधन कर ‘केरलम’ नाम दर्ज करने का आग्रह किया गया था।