भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन हिमाचल प्रदेश के दौरे पर कांगड़ा पहुंचे, जहां उन्होंने केंद्रीय विश्वविद्यालय के 9वें दीक्षांत समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने मेधावी छात्रों को डिग्रियां और पदक प्रदान किए। अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने डिग्री प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को शुभकामनाएं दीं और उन्हें देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
802 छात्रों को मिली डिग्रियां
कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल के अनुसार इस वर्ष दीक्षांत समारोह में कुल 802 छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें 420 छात्राएं और 382 छात्र शामिल हैं। डिग्री प्राप्त करने वालों में 37 पीएचडी, 665 स्नातकोत्तर (PG), 89 स्नातक (UG) और 11 एमफिल के छात्र शामिल रहे।
52 छात्रों को मिला गोल्ड मेडल
शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए समारोह में 52 मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। दीक्षांत समारोह की परंपरा के अनुसार सभी छात्र-छात्राएं भारतीय पारंपरिक परिधानों में अपनी डिग्री लेने पहुंचे। समारोह के दौरान एक दिलचस्प स्थिति तब बनी जब सुबह कुछ छात्र-छात्राएं देर से कैंपस पहुंचे। शुरुआत में उन्हें सभागार में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। हालांकि छात्रों के बार-बार अनुरोध के बाद कुछ समय बाद उन्हें सभागार में प्रवेश करने की अनुमति दे दी गई।
हिमाचल को बताया देवभूमि और वीरभूमि
अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने हिमाचल प्रदेश को देवभूमि और वीरभूमि बताते हुए कहा कि इस राज्य ने देश की सशस्त्र सेनाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों से फैकल्टी विकास, नवाचार और सहयोग को बढ़ावा देने की अपील की, ताकि वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धी शिक्षा प्रणाली विकसित की जा सके।
विकसित भारत 2047 के विजन पर जोर
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि इस सपने को साकार करने में युवाओं और छात्रों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विकास की प्रक्रिया समावेशी होनी चाहिए और इसमें समाज के किसी भी वर्ग या क्षेत्र को पीछे नहीं छोड़ा जाना चाहिए।