US Iran War: अमेरिका ने एक बार फिर ईरान पर बड़ा सैन्य हमला किया है। इस बार होर्मुज स्ट्रेट के आसपास मौजूद ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। हमले के दौरान सिरिक इलाके में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। ईरानी मीडिया ने भी इन हमलों की पुष्टि की है। यह पिछले 24 घंटे के भीतर अमेरिका की ओर से ईरान पर किया गया दूसरा बड़ा हमला है।
हमले की वजह क्या बताई गई?
अमेरिकी सेना के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट के पास मौजूद ईरानी सैन्य ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की गई। अमेरिका का दावा है कि ईरान ने पनामा के झंडे वाले एक तेल टैंकर पर ड्रोन हमला कर युद्धविराम समझौते को तोडा है। इसी का कड़ा जवाब देते हुए ईरान के सैन्य ठिकानों को अमेरिका ने निशाना बनाया है।
अमेरिकी सेना का आधिकारिक बयान
अमेरिकी सेना ने बताया, ‘कमांडर-इन-चीफ के निर्देश पर US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की फोर्स ने 27 जून को ईरान में कई ठिकानों पर और हमले किए। M/V एवर लवली पर ईरानी हमले के जवाब में कल अमेरिका द्वारा किए गए हमलों के बाद, ईरान को युद्धविराम समझौते का पालन करने का मौका दिया गया था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। इसके बजाय, उसकी फोर्स ने एक वन-वे अटैक ड्रोन लॉन्च किया, जिसने आज सुबह 4:30 बजे (ET) M/T किकू को निशाना बनाया। पनामा के झंडे वाला यह टैंकर 20 लाख बैरल से ज्यादा कच्चे तेल के साथ होर्मुज स्ट्रैट के पास से गुजर रहा था। कमर्शियल शिपिंग के खिलाफ ईरान की लगातार आक्रामकता के सीधे जवाब में CENTCOM की फोर्स ने आज हमले किए। अमेरिका के मिलिट्री एयरक्राफ्ट ने ईरान के मिलिट्री सर्विलांस इंफ्रास्ट्रक्चर, कम्युनिकेशन सिस्टम, एयर डिफेंस साइट्स, ड्रोन स्टोरेज फैसिलिटीज और माइनलेयर क्षमताओं को निशाना बनाया। होर्मुज स्ट्रैट से कमर्शियल जहाजों का आना-जाना जारी है। US फोर्स सतर्क, घातक और तैयार है।’
किन ठिकानों को बनाया गया निशाना?
अमेरिकी सेना के मुताबिक, इस अभियान में ईरान के सैन्य निगरानी ढांचे, संचार प्रणाली, एयर डिफेंस साइट्स, ड्रोन स्टोरेज फैसिलिटीज और माइन बिछाने की क्षमताओं को निशाना बनाया गया। सेना ने यह भी कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी है और अमेरिकी बल पूरी तरह सतर्क है।
ट्रंप ने दी कड़ी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को सोशल मीडिया पर लिखा, ‘अमेरिका के विमानों ने अभी-अभी ईरान के मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज ठिकानों और तटीय रडार साइटों पर हमला किया है, क्योंकि उन्होंने फिर से सीजफायर समझौते का उल्लंघन किया है! हो सकता है कि एक समय ऐसा आए जब हम समझदारी से काम न ले पाएं और हमें उस काम को सैन्य तरीके से पूरा करने के लिए मजबूर होना पड़े, जिसे हमने बहुत सफलतापूर्वक शुरू किया था। अगर ऐसा हुआ, तो ईरान का अस्तित्व ही नहीं रहेगा।’
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