एनआईए की विशेष अदालत ने उत्तर प्रदेश(UP Cities) में बड़े आतंकी हमलों की साजिश से जुड़े मामले में तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। अधिकारियों के अनुसार, दोषियों की पहचान लखनऊ निवासी मुसीरुद्दीन उर्फ राजू, मिन्हाज अहमद उर्फ मिन्हाज और जम्मू-कश्मीर के बडगाम के तौहीद अहमद शाह उर्फ सोबू शाह के रूप में हुई है। अदालत ने तीनों को अलग-अलग अवधि की सजा सुनाई है, जो पांच साल के कठोर कारावास से लेकर उम्रकैद तक है। साथ ही प्रत्येक पर 20 हजार रुपये तक का जुर्माना भी लगाया गया है।
इस मामले में पहले ही तीन अन्य आरोपी शकील, मोहम्मद मुस्तकीम और मोहम्मद मोईद को शस्त्र अधिनियम के तहत दोषी ठहराया जा चुका है, क्योंकि उन्होंने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था।
2022 में NIA ने दाखिल किए थे आरोप पत्र
NIA ने वर्ष 2022 में इस केस में कुल छह आरोपियों के खिलाफ दो अलग-अलग आरोपपत्र दाखिल किए थे। मूल रूप से यह मामला जुलाई 2021 में दर्ज हुआ था, जब उत्तर प्रदेश एटीएस ने अल-कायदा से जुड़े मुसीरुद्दीन और मिन्हाज को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान सामने आया कि ये दोनों ‘अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट’ (AQIS) से जुड़े मॉड्यूल के तहत ‘अंसार गजवातुल हिंद’ (AGH) के लिए काम कर रहे थे। इनका उद्देश्य युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रेरित करना और उनकी भर्ती करना था, ताकि स्वतंत्रता दिवस 2021 से पहले लखनऊ सहित कई शहरों में आतंकी हमले किए जा सकें।
आतंकी संगठन ने रची साजिश
आगे की जांच में खुलासा हुआ कि मिन्हाज को तौहीद और एक अन्य आरोपी आदिल नबी तेली उर्फ मूसा ने कट्टरपंथ की राह पर डाला था। तीनों ने मिलकर आतंकी संगठन के लिए नए सदस्यों की भर्ती की साजिश रची। बाद में मिन्हाज ने मुसीरुद्दीन को भी इस नेटवर्क में शामिल किया, जिसने उसके कहने पर निष्ठा की शपथ (बैयत) ली। इसके बाद सभी ने मिलकर अन्य सहयोगियों की मदद से हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक जुटाने की कोशिश की।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, आदिल नबी तेली उर्फ मूसा का संबंध लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन टीआरएफ से था। उसे तौहीद के जरिए मिन्हाज से आर्थिक सहायता भी मिलती थी। मार्च 2022 में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मूसा मारा गया था। बाद में एनआईए ने अगस्त 2022 में उसके खिलाफ संशोधित आरोपपत्र भी दाखिल किया था।