Thursday, February 19, 2026
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कांग्रेस में इस्तीफे को लेकर गर्माया माहौल, पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह ने मांगा प्रदेश अध्यक्ष का इस्तीफा

चंद्रशेखर धरणी: हरियाणा के विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद से ही कांग्रेस में राजनीति गर्माई हुई है। प्रदेश अध्यक्ष और प्रभारी के बीच एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं। वहीं, अब इनके बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता चौधरी बीरेंद्र सिंह ने हरियाणा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष का इस्तीफा मांगते हुए संगठन में बड़े बदलाव की जरूरत पर जोर दिया है। बीरेंद सिंह ने कहा कि र के कई कारण हैं, लेकिन हरियाणा में कांग्रेस संगठन का ना होना प्रमुख कारण रहा। यहां कांग्रेस को जन-जन की पार्टी बनाने के लिए मैं एक बड़ा आंदोलन चलाऊंगा।

हार नैतिक जिम्मेदारी का सवाल

चौधरी बीरेंद्र सिंह ने किसी का नाम लिए बिना कहा, “हरियाणा में सब कुछ एक नेता के नाम पर केंद्रित था। यह गलत संदेश गया कि कांग्रेस की सरकार नहीं, बल्कि एक व्यक्ति की सरकार बन रही है। हार के बाद प्रदेश अध्यक्ष की नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने पद से इस्तीफा दे। राजनीति में ऐसा हमेशा होता रहा है, लेकिन मुझे आश्चर्य है कि हरियाणा में अब तक ऐसा क्यों नहीं हुआ। भाजपा पर भी लगाए गंभीर आरोप वीरेंद्र सिंह ने भाजपा पर भी हमला बोला और कहा कि पार्टी ने बागी कांग्रेस नेताओं पर खूब पैसा खर्च किया और चुनाव में सत्ता, मशीनरी और वित्तीय संसाधनों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि ईवीएम के अलावा हरियाणा में कई बाहरी ताकतों ने भी काम किया। जब धर्म कार्ड काम नहीं आया तो जातिगत ध्रुवीकरण का सहारा लिया गया।” “मेरा लक्ष्य हरियाणा को कांग्रेस की जनता की पार्टी बनाना है। मेरा लक्ष्य है कि पार्टी हर वर्ग और हर समुदाय तक पहुंचे।

चुनावी रणनीति पर सवाल

बीरेंद्र सिंह ने कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी में संगठन की कमी और नेतृत्व की गलतियां हार का मुख्य कारण बनीं। उन्होंने कहा कि यह समय आत्ममंथन का है और अगर पार्टी में बदलाव नहीं हुआ तो जनता से जुड़ने का सपना अधूरा रह जाएगा। चौधरी वीरेंद्र सिंह के इस बयान से हरियाणा कांग्रेस में हलचल मच गई है। अब देखना यह है कि पार्टी नेतृत्व इस पर क्या कार्रवाई करता है और क्या प्रदेश अध्यक्ष अपने पद से इस्तीफा देंगे। उन्होंने कहा कि हरियाणा में धर्म का कार्ड काम नहीं किया, इसलिए जातीय ध्रुवीकरण का सहारा लिया गया। मैंने हमेशा से यह नहीं माना कि हरियाणा में जन भावना की सरकार है।

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