Punjab and Haryana High Court: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने वैश्विक तेल संकट के बीच ईंधन बचत को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अदालत प्रशासन ने न्यायिक और प्रशासनिक कामकाज में कई अहम बदलाव लागू किए हैं। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य पेट्रोल-डीजल का यूज कम करना और डिजिटल तरह से काम को बढ़ावा देना है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई
हाईकोर्ट की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि अब ज्यादातर मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए करने पर जोर दिया जाएगा। इसके लिए रजिस्ट्रार को सभी पक्षों तक समय पर वीडियो लिंक पहुंचाने और तकनीकी सहायता मजबूत रखने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने यह भी साफ किया है कि वर्चुअल सुनवाई के दौरान किसी भी वकील या न्यायिक अधिकारी को तकनीकी परेशानी नहीं होनी चाहिए।
जजों को कार-पूलिंग अपनाने की सलाह
ईंधन बचत को बढ़ावा देने के लिए हाईकोर्ट ने न्यायाधीशों को कार-पूलिंग अपनाने की सलाह भी दी है। यानी एक से ज्यादा जज एक ही वाहन से अदालत पहुंच सकते हैं। अदालत का मानना है कि छोटे स्तर पर किए गए ऐसे प्रयास बड़े पैमाने पर फ्यूल सेविंग में मददगार साबित हो सकते हैं। हाईकोर्ट के इस फैसले को ईंधन बचत की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
33% कर्मचारियों को मिलेगी वर्क फ्रॉम होम
प्रशासनिक व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव किया गया है। हाईकोर्ट की अलग-अलग शाखाओं और विभागों में जहां संभव होगा, वहां 33% तक कर्मचारियों को ‘वर्क फ्रॉम होम’ की अनुमति दी जाएगी। हालांकि अदालत ने यह भी कहा है कि जरूरी स्टाफ कार्यालय में मौजूद रहे, ताकि न्यायिक कामकाज प्रभावित न हो।
हर सप्ताह होगी जांच
हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रारों को निर्देश दिए हैं कि वे हर सप्ताह कार्य व्यवस्था की समीक्षा करें और पहले से ड्यूटी रोस्टर तैयार रखें। घर से काम कर रहे कर्मचारियों को फोन पर उपलब्ध रहने और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्यालय पहुंचने के निर्देश भी दिए गए हैं।
जरूरत पड़ने पर खत्म हो सकती है व्यवस्था
अदालत ने यह भी साफ किया है कि जिन शाखाओं में वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था प्रभावी नहीं पाई जाएगी, वहां इसे सीमित या समाप्त किया जा सकता है। इसके लिए संबंधित रजिस्ट्रार को रजिस्ट्रार जनरल से अनुमति लेनी होगी।
सार्वजनिक परिवहन- ई-व्हीकल्स को बढ़ावा
ईंधन बचत के लिए कर्मचारियों को सार्वजनिक परिवहन, साइकिल और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है। अदालत का मानना है कि बदलते वैश्विक हालात में संस्थानों को टिकाऊ और जिम्मेदार प्रणाली अपनाने की जरूरत है।
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