NDA Meeting in Delhi: संसद के आगामी मॉनसून सत्र से पहले NDA आज दिल्ली में अहम बैठक करेगा। यह बैठक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर होगी, जिसमें गृह मंत्री अमित शाह, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू समेत गठबंधन के कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। बैठक में 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मॉनसून सत्र के लिए सरकार की रणनीति और विधायी एजेंडे पर चर्चा की जाएगी। इससे पहले सरकार 19 जुलाई को सर्वदलीय बैठक भी बुलाएगी, जिसमें विपक्ष अपने प्रमुख मुद्दे उठाएगा।
रणनीति के केंद्र में होंगे कई संवेदनशील मुद्दे
सूत्रों के अनुसार, बैठक का मुख्य उद्देश्य नीट (NEET) पेपर लीक, राम मंदिर में दान की हेराफेरी और संविधान संशोधन विधेयक जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विपक्ष के संभावित हमलों का जवाब देने के लिए रणनीति तैयार करना है। इसके साथ ही सत्ताधारी गठबंधन आगामी सत्र में पेश होने वाले अहम विधेयकों को पारित कराने के लिए अपनी संख्या बल और संसदीय रणनीति पर भी मंथन करेगा।
NDA के पास है बढ़त
सूत्रों का कहना है कि हालिया विधानसभा चुनावों के बाद सत्ताधारी गठबंधन अपने पक्ष को पहले से अधिक मजबूत मान रहा है। पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी के चुनाव परिणामों के बाद विपक्ष की स्थिति कमजोर हुई है। वहीं तमिलनाडु में टीवीके (TVK) द्वारा सरकार गठन को लेकर कांग्रेस और द्रमुक (DMK) के बीच बढ़े मतभेदों को भी एनडीए अपने लिए राजनीतिक बढ़त के रूप में देख रहा है।
नंबर गेम की होगी बड़ी परीक्षा
बताया जा रहा है कि संसद की संयुक्त समिति संविधान संशोधन विधेयक पर अपनी रिपोर्ट इस सत्र के दौरान पेश कर सकती है। इस प्रस्तावित विधेयक में गंभीर आरोपों में लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रहने पर प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को पद से हटाने का प्रावधान शामिल है। इस विधेयक को पारित कराने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की जरुरत होगी। ऐसे में यह सत्र एनडीए के लिए संख्या बल की बड़ी परीक्षा भी माना जा रहा है।
अहम विधेयकों पर भी रहेगी नजर
आगामी मॉनसून सत्र में सरकार महिला कोटा कानून और संशोधित परिसीमन विधेयक भी संसद में पेश कर सकती है। दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक भागीदारी को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच सरकार सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत तक वृद्धि के कई विकल्पों पर विचार कर रही है। प्रस्तावित मसौदा इस उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है कि जनसंख्या आधारित परिसीमन के बावजूद दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक हिस्सेदारी प्रभावित न हो।
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