भारत ने कहा है कि जब भी ज़रूरत होगी, वह अमेरिका के साथ बातचीत करेगा ताकि उन भारतीय नागरिकों की मुश्किलें कम की जा सकें जिन्हें वाशिंगटन के वीजा और इमिग्रेशन नियमों में बदलाव के कारण परेशानी हो रही है। इन बदलावों से छात्रों, एक्सचेंज विज़िटर्स और मीडिया प्रोफेशनल्स पर असर पड़ने की उम्मीद है।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि वीजा और इमिग्रेशन नीतियां हर देश का अपना अधिकार हैं। हालांकि, मंत्रालय ने ज़ोर देकर कहा कि सरकार असली भारतीय यात्रियों और छात्रों पर असर डालने वाले मुद्दों को लेकर सतर्क है और ज़रूरत पड़ने पर अमेरिकी अधिकारियों के सामने ऐसे मामले उठाएगी।
भारत का समर्थन का भरोसा
शुक्रवार को एक मीडिया ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सरकार को अमेरिकी वीज़ा नियमों में बदलाव के बारे में जानकारी है। जायसवाल ने कहा, “वीज़ा नियम, वीज़ा से जुड़े काम और इमिग्रेशन के मामले किसी भी देश के अपने अधिकार क्षेत्र में आते हैं।”
उन्होंने कहा कि भारत घटनाक्रम पर बारीकी से नज़र रखता है और जब भी भारतीय नागरिक मदद मांगते हैं, तो वह अमेरिका के साथ इन मुद्दों को उठाता है। उन्होंने कहा, “जब भी असली यात्रियों, छात्रों और अमेरिका में मदद चाहने वाले अन्य लोगों से जुड़ी कोई समस्या या मुश्किल हमारे ध्यान में आती है, तो हम अमेरिकी पक्ष के साथ उन मुद्दों को उठाते हैं ताकि हमारे लोगों को होने वाली मुश्किलों को कम किया जा सके।”
ये बातें अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) द्वारा नए नियम घोषित करने के बाद कही गई हैं। इन नियमों से उस पुरानी व्यवस्था को खत्म कर दिया गया है जिसके तहत कुछ विदेशी नागरिक अपने वीज़ा की शर्तों का पालन करते हुए अनिश्चित काल तक अमेरिका में रह सकते थे।
नए वीज़ा नियमों की जानकारी
नए नियमों के तहत, F, J और I कैटेगरी वाले नॉन-इमिग्रेंट वीज़ा होल्डर्स को अब अपने प्रोग्राम या असाइनमेंट की पूरी अवधि के बजाय सिर्फ़ एक तय समय के लिए अमेरिका में रहने की इजाज़त होगी। F कैटेगरी छात्रों के लिए है, J कैटेगरी एक्सचेंज विज़िटर्स के लिए है, जबकि I कैटेगरी काम करने वाले मीडिया प्रोफेशनल्स के लिए है।
सबसे बड़े बदलावों में से एक F वीज़ा होल्डर्स के लिए है। पढ़ाई पूरी करने के बाद मिलने वाले ग्रेस पीरियड (अतिरिक्त समय) को 60 दिन से घटाकर 30 दिन कर दिया गया है। इस दौरान छात्रों को या तो अमेरिका छोड़ना होगा, किसी दूसरे शिक्षण संस्थान में ट्रांसफर लेना होगा या अपना इमिग्रेशन स्टेटस बदलना होगा। यह नियम तय लागू करने की प्रक्रिया के तहत 15 सितंबर, 2026 से लागू होगा।
भारतीय छात्रों पर असर
नए नियमों का भारतीय छात्रों और एकेडमिक विज़िटर्स पर काफ़ी असर पड़ने की उम्मीद है, जो अमेरिका में सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय समुदायों में से एक हैं। भारत का यह भरोसा कि वह वॉशिंगटन के सामने अपनी वाजिब चिंताएं उठाता रहेगा, यह दिखाता है कि वह अपने नागरिकों के हितों की रक्षा करने के साथ-साथ अमेरिकी सरकार के अपनी इमिग्रेशन पॉलिसी बनाने के अधिकार का भी सम्मान करता है।
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