Thursday, February 12, 2026
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श्री गुरु तेग बहादुर जी की शहीदी शताब्दी, 25 नवंबर को दिल्ली समेत इन राज्यों में रहेगा अवकाश

श्री गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहीदी दिवस – अवकाश एवं महत्व

25 नवंबर 2025 को नौवें सिख गुरु, श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की शहादत की 350वीं वर्षगांठ (Shaheedi Diwas) है। इस पवित्र अवसर को यादगार बनाने के लिए कई राज्यों और क्षेत्रों ने अवकाश घोषित किया है, ताकि श्रद्धालु और नागरिक गुरु साहिब की विरासत को सम्मान और सोच के साथ मनाएं और उनकी शिक्षाओं से प्रेरणा लें।

दिल्ली में सार्वजनिक अवकाश

  • दिल्ली सरकार ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के ऐलान के अनुसार, 25 नवंबर 2025 को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है।

  • रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “X” पर कहा है कि श्री गुरु तेग बहादुर साहिब की “साहस, करुणा और धार्मिक स्वतंत्रता का संदेश हमें सदैव प्रेरित करता रहेगा।”

  • इसके साथ ही, दिल्ली में 23 से 25 नवंबर तक लाल किले पर तीन दिवसीय “गुरमत समागम” (Gurmat Samagam) आयोजित किया जा रहा है, जहाँ श्रद्धालु एक साथ इकट्ठा होकर ध्यान, कीर्तन और श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

अन्य राज्यों और क्षेत्रों में अवकाश

  • उत्तर प्रदेश (UP): योगी सरकार ने भी 25 नवंबर 2025 को श्री गुरु तेग बहादुर जी की शहीदी दिवस के रूप में अवकाश की पुष्टि की है।

  • चंडीगढ़: चंडीगढ़ प्रशासन ने घोषणा की है कि 25 नवंबर को सरकारी कार्यालयों, बोर्डों, निगमों, और संस्थानों में अवकाश रहेगा।

  • हरियाणा: कुछ पुराने प्रेस रिलीज़ में हरियाणा सरकार ने श्री गुरु तेग बहादुर की शहादत दिवस को “रिस्ट्रिक्टेड हॉलिडे” के रूप में घोषित किया है।

  • उत्तराखंड: कुछ रिपोर्टों में यह उल्लेख है कि उत्तराखंड में भी यह अवसर मनाया जाता है।

गुरु तेग बहादुर साहिब जी का महत्व और उनकी शहादत का संदेश

  • जीवन और बलिदान: श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी ने धार्मिक स्वतंत्रता और मानव अधिकारों की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर किए। उनकी शहादत भारत में बहु-धार्मिक सहिष्णुता और सम्मान का प्रतीक है।

  • आध्यात्मिक और ऐतिहासिक भूमिका: श्री गुरु साहिब की शिक्षाएँ, जैसे करुणा, त्याग, और न्याय के लिए खड़े होने की प्रेरणा, आज के समय में भी प्रासंगिक हैं। दिल्ली की सरकार इसी को मान्यता देते हुए बड़े समारोह आयोजित कर रही है।

  • समूह आयोजन: तीन-दिवसीय गुरमत समागम जैसी धार्मिक झलक कार्यक्रमों का आयोजन इस शताब्दी वर्षगाँठ को और भी महत्वपूर्ण बना रहा है।

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