पाकिस्तान में सक्रिय प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा(Lashkar) से जुड़े कुछ ट्रेनिंग प्रोग्राम को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। दावा किया जा रहा है कि इन गतिविधियों में युवाओं को सिर्फ वैचारिक रूप से प्रभावित करने तक सीमित नहीं रखा जा रहा बल्कि उन्हें शारीरिक और तकनीकी स्तर पर भी तैयार करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, इन दावों की पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
रिपोर्टों के मुताबिक, भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों में शामिल राणा मोहम्मद अशफाक कथित तौर पर ऐसे ट्रेनिंग प्रोग्राम से जुड़ा हुआ है। दावा किया जा रहा है कि युवाओं को तैराकी, जूडो, कराटे, ताइक्वांडो, कुश्ती और अन्य शारीरिक अभ्यास कराए जा रहे हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का प्रशिक्षण कठिन परिस्थितियों में काम आने वाले कौशल विकसित करने के मकसद से दिया जा सकता है।
आधुनिक तकनीक और एआई पर भी फोकस
जानकारी के अनुसार, कुछ प्रशिक्षण शिविरों में महिलाओं को स्किल डेवलपमेंट के नाम पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और अन्य डिजिटल तकनीकों से परिचित कराने का भी दावा किया गया है। सामने आए कथित वीडियो में आधुनिक तकनीक सीखने की आवश्यकता पर जोर दिए जाने की बात कही गई है। इसके साथ ही वह उसमें कहता दिखाई दे रहा है कि “दुश्मन तकनीक के मामले में काफी आगे है, इसलिए मुजाहिदों को भी आधुनिक तकनीक सीखनी होगी.”
सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे दावे सही साबित होते हैं, तो यह संकेत हो सकता है कि आतंकी संगठन पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ साइबर, सूचना और तकनीक आधारित गतिविधियों पर भी ध्यान दे रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां ऐसी संभावित गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और मुहैया की गई सभी सूचनाओं की जांच कर रही हैं।