डिजिटल दौर में बेहतर शासन के लिए भरोसेमंद और समेकित आंकड़े बेहद जरूरी होते जा रहे हैं। इसी कड़ी में हिमाचल प्रदेश ने ‘हिम परिवार’ पहल के जरिए नई मिसाल पेश की है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में शुरू की गई यह योजना के तहत एकीकृत और डेटा आधारित शासन मॉडल की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। वित्तीय वर्ष 2023-24 के बजट में घोषित इस पहल का उद्देश्य राज्य के हर परिवार और नागरिक की सामाजिक-आर्थिक जानकारी को एक मंच पर लाना था। अब यह पहल एक मजबूत राज्य सामाजिक रजिस्ट्री के रूप में विकसित हो चुकी है।
19 लाख से ज्यादा परिवार जुड़े
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म पर अब तक 19,25,258 परिवार और 75,92,697 सदस्य पंजीकृत हो चुके हैं। यह न सिर्फ प्रशासनिक दक्षता को दर्शाता है, बल्कि प्रमाणित आंकड़ों के आधार पर नीति निर्माण की दिशा में बड़ा बदलाव भी है। हर परिवार और सदस्य को एक विशिष्ट पहचान संख्या दी गई है, जिससे योजनाओं का लाभ सही पात्र तक पहुंचाना आसान हो गया है। इस पहल का मुख्य आधार हिम एक्सेस सिंगल साइन-ऑन (SSO) प्लेटफॉर्म है। इसके जरिए नागरिक और सरकारी कर्मचारी एक ही यूजर ID और पासवर्ड से कई सरकारी सेवाओं का लाभ ले सकते हैं। फिलहाल वर्तमान में 7.2 लाख से अधिक उपयोगकर्ता और करीब 46 हजार सरकारी कर्मचारी इस प्रणाली से जुड़े हैं।
फर्जी लाभार्थियों पर लगाई रोक
हिम परिवार योजना के तहत मोबाइल सर्वेक्षण और रियल टाइम सत्यापन से आंकड़ों को लगातार अपडेट किया जा रहा है। सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं में 39,697 मृत, 5,595 अपात्र और 600 अनुपलब्ध लाभार्थियों की पहचान कर लाभ रोक दिया गया है। इससे राज्य को हर महीने करीब 5 करोड़ रुपये की बचत हो रही है। राज्य सरकार का कहना है कि हिम परिवार सिर्फ डेटा प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि पारदर्शिता, दक्षता और समावेशी विकास का आधार है। लाखों नागरिकों को एक डिजिटल मंच पर जोड़कर हिमाचल प्रदेश ने उत्तरदायी और भविष्य उन्मुख शासन व्यवस्था की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है।
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