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डूबती एयरलाइंस को सरकार का सहारा, 4000 करोड़ के पैकेज से मिलेगी नई उड़ान…

एयरलाइंस सेक्टर को राहत देने के लिए केंद्र सरकार(Government) एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार करीब 4,000 करोड़ रुपये का इमरजेंसी लोन प्रोग्राम शुरू करने की तैयारी में है, जिसका उद्देश्य मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों, खासकर मध्य-पूर्व में तनाव के चलते प्रभावित ऑपरेशंस को संभालना है।

इस योजना के तहत प्रत्येक एयरलाइन को अधिकतम 1,000 करोड़ रुपये तक के लोन पर सरकारी गारंटी दी जाएगी। इसके अलावा कंपनियां 500 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त लोन भी ले सकेंगी, लेकिन इसके लिए उन्हें उतनी ही राशि खुद निवेश करनी होगी। यह पहल वित्त मंत्रालय की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके जरिए सरकार गारंटी देकर विभिन्न क्षेत्रों को वित्तीय सहारा दे रही है।

स्पाइसजेट को मिल सकता है सबसे अधिक फायदा

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह गारंटी केवल सहयोग के लिए है, जबकि लोन देने से पहले बैंक अपनी नियमित प्रक्रिया के तहत कंपनियों की वित्तीय स्थिति का आकलन करेंगे। माना जा रहा है कि इस योजना से सबसे अधिक फायदा स्पाइसजेट को मिल सकता है, जो इस समय नकदी संकट से जूझ रही है। कंपनी में वेतन में देरी और कर्मचारियों को बिना वेतन अवकाश पर भेजने जैसी समस्याएं भी सामने आ चुकी हैं।

इधर, जेट फ्यूल की बढ़ती कीमतों और मध्य-पूर्व क्षेत्र में उड़ानों में कटौती के कारण एयरलाइंस की लागत में काफी इजाफा हुआ है। दुबई जैसे प्रमुख हवाई अड्डों पर सीमित उड़ानों की अनुमति मिलने से भी कंपनियों की कमाई प्रभावित हुई है, क्योंकि खाड़ी देशों के रूट्स से उनकी आय का बड़ा हिस्सा आता है।

एयरलाइंस के संचालन पर पड़ रहा असर

हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम की घोषणा हुई है, लेकिन उड़ानों के सामान्य होने को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। कई हवाई अड्डे एहतियात बरत रहे हैं, जिससे एयरलाइंस के संचालन पर असर पड़ रहा है। स्पाइसजेट की स्थिति खासतौर पर चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। कंपनी के करीब 37 विमान फिलहाल खड़े हैं, जिसकी वजह लीज भुगतान और स्पेयर पार्ट्स की कमी बताई जा रही है।

2024 में जुटाए गए फंड का बड़ा हिस्सा खर्च हो चुका है, लेकिन हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं। वहीं, जेट एयरवेज और गो फर्स्ट जैसी कंपनियों के बंद होने के बाद बैंक भी इस सेक्टर को कर्ज देने में अधिक सतर्क हो गए हैं। ऐसे में सरकार की यह पहल एयरलाइंस उद्योग को स्थिरता देने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

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