Toll Plaza Protest: पंजाब में टोल प्लाजा पर काम करने वाले कर्मचारियों ने केंद्र सरकार की कैशलेस नीति के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस विरोध के तहत लुधियाना जिले के लाडोवाल टोल प्लाजा समेत कई टोल प्लाजा को दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक पूरी तरह से फ्री कर दिया गया, जिससे वाहन चालकों को बिना शुल्क दिए गुजरने की अनुमति दी गई।
कैशलेस नीति पर बढ़ता विवाद
यह प्रदर्शन टोल प्लाजा वर्कर्स यूनियन पंजाब (रजि.) के नेतृत्व में किया गया, जिसमें राज्यभर के टोल कर्मियों ने भाग लिया। यूनियन का कहना है कि कैशलेस प्रणाली को जबरन लागू करने के कारण उन्हें रोजाना कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
टोल कर्मियों की बढ़ती समस्याएं
यूनियन के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई कैशलेस प्रणाली को लेकर वाहन चालकों और टोल कर्मचारियों के बीच लगातार विवाद हो रहे हैं। कई वाहन चालक ऑनलाइन भुगतान करने में असमर्थ या अनिच्छुक होते हैं, जिसके कारण टोल कर्मियों को बहस और झगड़ों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में हर नागरिक को अपनी मुद्रा यानी नकद में भुगतान करने का अधिकार है। अगर लोग अपने ही देश में नकद का इस्तेमाल नहीं कर सकते, तो यह एक गंभीर मुद्दा है। उनका आरोप है कि इस नीति के कारण ब्लैकमेलिंग जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
सरकार से नीति वापस लेने की मांग
कर्मचारियों ने केंद्र सरकार से इस नीति को तुरंत रद्द करने की मांग की। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब अन्य जगहों जैसे एयरपोर्ट या बड़े सरकारी संस्थानों में पूरी तरह कैशलेस व्यवस्था लागू नहीं है, तो केवल टोल प्लाजा पर ही इसे क्यों लागू किया जा रहा है। कमर्चारियों का कहना है कि, बड़ी-बड़ी रकम का लेन-देन आज भी नकद में होता है, लेकिन टोल प्लाजा पर 100 से 300 रुपये तक के छोटे भुगतान को भी कैशलेस करने का दबाव बनाया जा रहा है, जो तर्कसंगत नहीं है। इसके कारण टोल प्लाजा पर लंबी कतारें लग रही हैं और कई बार वाहन चालक दूसरों को पैसे देकर निकलने की कोशिश करते हैं।
नकद भुगतान को लेकर टकराव
वहीं यूनियन के अनुसार कैशलेस प्रणाली को केवल टोल प्लाजा तक सीमित रखना गलत है। अगर सरकार इसे लागू करना चाहती है, तो इसे सभी क्षेत्रों में समान रूप से लागू करना चाहिए। नकद भुगतान करने वाले वाहन चालकों के साथ उनका रोजाना विवाद होता है, जिससे काम का माहौल प्रभावित हो रहा है। यूनियन मेंबर्स के अनुसार कई बार राहगीर टोल कर्मचारियों पर गुंडागर्दी के आरोप लगाते हैं, जबकि वे केवल सरकार की नीति का पालन कर रहे होते हैं। ऐसे में कर्मचारियों को मानसिक दबाव और असुविधा झेलनी पड़ रही है। टोल कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि उनका यह विरोध प्रदर्शन केवल अपनी समस्याओं को उजागर करने और सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए है। उन्होंने दोहराया कि जब तक नीति में बदलाव नहीं किया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
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