पंजाब में हाल ही में लागू किए गए बेअदबी से जुड़े सख्त कानून के तहत पहला मामला दर्ज किया गया है। यह घटना गुरुवार को मलोट कस्बे में सामने आई, जहां एक सड़क पर सुखमनी साहिब के गुटके (प्रार्थना पुस्तक) के करीब 40 फटे हुए पन्ने बिखरे मिले। कानून लागू होने के कुछ ही दिनों बाद इस तरह की यह पहली प्रमुख घटना मानी जा रही है।
स्थानीय निवासी जंगीर सिंह की शिकायत के आधार पर मलोट थाने में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। यह केस जागृत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम(Sacrilege Act, Punjab) के तहत दर्ज हुआ है।
मामले की जांच में जुटी पुलिस
पुलिस इस मामले की जांच में जुट गई है। मुक्तसर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु राणा ने बताया कि शुरुआती तौर पर यह घटना किसी सुनियोजित शरारत का परिणाम नहीं लगती। उन्होंने कहा कि पुलिस उपाधीक्षक हरप्रीत सिंह मान की अगुवाई में टीम इलाके के लोगों से पूछताछ कर रही है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, पन्नों को एकत्र किया और धार्मिक मर्यादा का पालन करते हुए उन्हें नजदीकी गुरुद्वारे को सौंप दिया गया।
DCP मान के अनुसार, आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कहीं ये फटे पन्ने कबाड़ इकट्ठा करने वालों के जरिए तो इलाके में नहीं पहुंचे, जो आसपास के गांवों और कस्बों से पुरानी किताबें और अन्य सामान जुटाते हैं।
SGPC ने की सख्त कार्रवाई की मांग
इस घटना के बाद शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के प्रतिनिधियों ने पुलिस अधिकारियों से मुलाकात कर दोषियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की मांग की। SGPC के मीडिया सचिव हरभजन सिंह ने कहा कि केवल एफआईआर दर्ज करना पर्याप्त नहीं है बल्कि जिम्मेदार लोगों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। वहीं, संगठन के कानूनी सलाहकार अमनबीर सिंह स्याली ने कहा कि जब तक आरोपियों की पहचान नहीं होती तब तक न्याय अधूरा रहेगा। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता नील गर्ग ने कहा कि पुलिस ने नए कानून के तहत तेजी से कार्रवाई की है और दोषियों को पकड़ने के प्रयास जारी हैं।
गौरतलब है कि पंजाब विधानसभा द्वारा पारित इस संशोधित कानून में धार्मिक ग्रंथों के अपमान के मामलों में सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। दोषी पाए जाने पर आजीवन कारावास और 25 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इस कानून को 17 अप्रैल को राज्यपाल की मंजूरी मिली थी और 20 अप्रैल से यह लागू हो गया। सरकार का कहना है कि पहले भी बेअदबी की घटनाओं से लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं और सामाजिक तनाव पैदा हुआ है। मौजूदा कानूनी प्रावधान पर्याप्त सख्त नहीं थे इसलिए इस नए कानून को लाया गया ताकि ऐसे मामलों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।