FIR Against Bikram Majithia: पंजाब में शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम मजीठिया के खिलाफ दर्ज एफआईआर मामले पर आज पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। अकाली दल की ओर से दायर याचिका पर कोर्ट पहले ही पंजाब के डीजीपी, अमृतसर ग्रामीण के एसएसपी और मजीठा थाने के एसएचओ को नोटिस जारी कर चुका है। इस मामले ने पंजाब की राजनीति ने हलचल बढ़ा दी है।
पुलिस कार्रवाई के बाद बढ़ा विवाद
मजीठिया के खिलाफ दर्ज मामले में पुलिस ने सोमवार को अमृतसर और चंडीगढ़ में मौजूद उनके और उनके करीबियों के छह ठिकानों पर छापेमारी की थी। हालांकि पुलिस को सफलता नहीं मिली। इसके बाद पुलिस ने देर शाम उनका लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी कर दिया, ताकि वह देश छोड़कर बाहर न जा सकें।
सरकार ने SSP को भी हटाया
मामले के बीच पंजाब सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए अमृतसर ग्रामीण के एसएसपी सोहेल कासिम मीर का तबादला कर दिया। यह फैसला उस समय आया जब मजीठा थाना विवाद को लेकर राज्यभर में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई थी।
मजीठिया पर क्या हैं आरोप?
पुलिस के अनुसार, 30 मई को मजीठा थाने में दर्ज एफआईआर नंबर 90 के तहत नामजद आरोपी जोबनप्रीत सिंह को गिरफ्तार किया गया था। अगले दिन 31 मई को बड़ी संख्या में लोग थाने के बाहर जमा हो गए। आरोप है कि भीड़ ने पुलिसकर्मियों को धक्का देकर थाने में प्रवेश करने का प्रयास किया और इस दौरान बिक्रम मजीठिया भी मौके पर मौजूद थे।
थाने में घुसने और रिकॉर्ड से छेड़छाड़ का दावा
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि भीड़ थाने के अंदर पहुंच गई और सरकारी रिकॉर्ड व केस से संबंधित दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की गई। पुलिस का यह भी कहना है कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। हालात को नियंत्रित करने के लिए डीएसपी और एसएचओ मजीठा ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाने की कोशिश की।
आरोपी को छुड़ाने का आरोप
पुलिस का दावा है कि अधिकारियों के समझाने के बावजूद गिरफ्तार आरोपी जोबनप्रीत सिंह को कमरे से बाहर निकालकर ले जाने का प्रयास किया गया। इस दौरान एसएचओ का मोबाइल फोन छीनने की भी कोशिश की गई। पुलिस के मुताबिक बाद में आरोपी को दोबारा हिरासत में ले लिया गया।
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