Donald Trump on Pakistan: डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुए सीजफायर को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका पर नई बहस छेड़ दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि मौजूदा युद्धविराम कर उन्होंने पाकिस्तान पर ‘एहसान’ किया है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पाकिस्तान खुद को पश्चिम एशिया में एक अहम मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है।
चीन दौरे से लौटते वक्त ट्रंप का बयान
ट्रंप ने शुक्रवार (15 मई) को चीन की दो दिवसीय राजकीय यात्रा से लौटते समय एयरफोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने ईरान-अमेरिका तनाव और युद्धविराम को लेकर सवालों के जवाब दिए। ट्रंप ने कहा कि सीजफायर समझौते से पाकिस्तान को बड़ा फायदा हुआ है और यह कदम इस्लामाबाद के लिए राहत लेकर आया है।
उन्होंने इस दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और उप प्रधानमंत्री Ishaq Dar की भी तारीफ की। ट्रंप के बयानों को अब पाकिस्तान की राजनयिक सफलता और अमेरिका की रणनीतिक अपेक्षाओं, दोनों के नजरिए से देखा जा रहा है। हालांकि ट्रंप ने यह बयान पाकिस्तान की तारीफ करते हुए दिया था, लेकिन यह उसके लिए बेइज्जती से कम नहीं है।
ईरान सीजफायर में पाकिस्तान की भूमिका
राजनयिक सूत्रों के मुताबिक, इस्लामाबाद स्थित विदेश मंत्रालय ने ईरान के पांच सूत्रीय प्रस्ताव को तुरंत अमेरिका तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी। माना जा रहा है कि इसी पहल के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच जमे गतिरोध को तोड़ने में मदद मिली।
पाकिस्तान के लिए क्यों जरूरी था युद्धविराम
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान के लिए यह केवल कूटनीतिक सफलता नहीं, बल्कि आर्थिक मजबूरी भी थी। पश्चिम एशिया में लंबे संघर्ष की स्थिति पाकिस्तान की ईंधन आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर भारी असर डाल सकती थी। युद्धविराम के बाद पाकिस्तान ने अपने ऊर्जा मार्गों को सुरक्षित करने के साथ-साथ खुद को अंतरराष्ट्रीय संघर्ष समाधान में एक तटस्थ मंच के रूप में भी स्थापित करने की कोशिश की है। इससे इस्लामाबाद की वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक स्थिति मजबूत हो सकती है।
ट्रंप के बयान में छिपा संदेश
ट्रंप के बयान को केवल तारीफ के तौर पर नहीं देखा जा रहा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ‘एहसान’ शब्द का इस्तेमाल कर अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान को संदेश भी दिया है। इससे संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन अब क्षेत्रीय सुरक्षा मामलों में इस्लामाबाद से और ज्यादा सक्रिय भूमिका की उम्मीद कर रहा है। खास तौर पर अफगानिस्तान सीमा से जुड़े आतंकवाद और सीमा पार हमलों को लेकर अमेरिका की चिंता लगातार बनी हुई है। हाल ही में पाकिस्तान के बन्नू पुलिस चौकी पर हुए आतंकी हमले के बाद सुरक्षा हालात फिर चर्चा में आ गए हैं।
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