रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले भारत, चीन, अजरबैजान, स्लोवाकिया और हंगरी जैसे देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने के प्रस्ताव को अमेरिका में बड़ा समर्थन मिलने का दावा किया गया है। प्रस्तावित बिल के समर्थन में करीब 60 अमेरिकी सीनेटर बताए जा रहे हैं, जिससे इसके पारित होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस प्रस्ताव का समर्थन कर चुके हैं। हालांकि, कानून बनने के लिए बिल को सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से मंजूरी मिलने के बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की जरूरत होगी।
100% टैरिफ का प्रस्ताव
इस विधेयक का उद्देश्य रूस से ऊर्जा खरीदने वाले प्रमुख देशों पर आर्थिक दबाव बनाना है, ताकि रूसी तेल की बिक्री से होने वाली आमदनी को प्रभावित किया जा सके। बिल के शुरुआती प्रस्ताव में रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की बात थी, जिसे संशोधित कर अब 100 प्रतिशत तक कर दिया गया है। संशोधित प्रस्ताव में भारत समेत रूसी ऊर्जा के पांच प्रमुख खरीदारों को निशाना बनाए जाने की बात कही गई है। भारत रूस के कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल है और रूसी तेल के लिए दूसरा सबसे बड़ा निर्यात बाजार बताया गया है।
यूरोपीय देशों को छूट देने पर उठे सवाल
प्रस्ताव में कुछ यूरोपीय देशों के लिए छूट का प्रावधान भी रखा गया है। इसके तहत रूस से अपनी कुल प्राकृतिक गैस का 15 प्रतिशत से कम आयात करने और निर्भरता घटाने के लिए कदम उठा रहे यूरोपीय खरीदारों को प्रस्तावित कार्रवाई से बाहर रखा जा सकता है। वहीं, अमेरिका द्वारा अपने परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए रूस से आयात किए जाने वाले यूरेनियम को भी इस प्रस्ताव में शामिल नहीं किए जाने की बात कही गई है। इसे लेकर भारत की ओर से दोहरे मापदंड का सवाल उठाया गया है। बिल के सह-प्रायोजक डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लुमेंथल के अनुसार, प्रस्तावित टैरिफ विशेष रूप से पांच बड़े खरीदारों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं और यूरोपीय सहयोगियों को निशाना नहीं बनाया गया है।
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर पड़ सकता है असर
टैरिफ को लेकर नई दिल्ली में चिंता जताई जा रही है। भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। वर्ष 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने और मॉस्को पर पश्चिमी प्रतिबंध लगने के बाद भारत ने ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और घरेलू महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए रूस से तेल की खरीद बढ़ाई थी।
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