Friday, February 13, 2026
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चीन के विदेश मंत्री का भारत में तीन दिवसीय कार्यक्रम, PM मोदी से होगी मुलाकात

चीनी विदेश मंत्री वांग यी आज से तीन दिवसीय यात्रा पर भारत आ रहे हैं। वह 18 से 20 अगस्त तक भारत में रहेंगे। इस दौरान, वह विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल से मुलाकात करेंगे। वह प्रधानमंत्री मोदी से भी मुलाकात कर सकते हैं।

बताया जा रहा है कि वांग यी, डोभाल के साथ भारत-चीन सीमा पर 24वीं विशेष प्रतिनिधि (SR) बैठक में हिस्सा लेंगे। यह बैठक दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को सुलझाने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है।

वांग यी अपनी यात्रा के दौरान, विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे, जिसमें भारत-चीन संबंधों के विभिन्न पहलुओं, जैसे व्यापार, सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग, पर चर्चा होगी।

PM मोदी से करेंगे मुलाकात

इसके अलावा, वांग यी 19 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से 7-लोक कल्याण मार्ग पर मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात में द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

चीनी विदेश मंत्री की यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चीन के तियानजिन में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए निर्धारित यात्रा से पहले हो रही है। SCO शिखर सम्मेलन में 20 से ज़्यादा देशों के नेता और 10 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे, जिसे संगठन के इतिहास का सबसे बड़ा शिखर सम्मेलन माना जा रहा है।

आपको बता दें कि वांग यी की यह यात्रा भारत-चीन संबंधों में हाल के घटनाक्रमों के मद्देनज़र भी उल्लेखनीय है, जिसमें वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर देपसांग मैदानों और डेमचोक क्षेत्रों में गश्त फिर से शुरू करने और सैन्य वापसी पर सहमति शामिल है। इसके अलावा, कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली और पर्यटक वीज़ा को फिर से खोलना भी सांस्कृतिक और लोगों के बीच संबंधों के पुनर्निर्माण की दिशा में सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

वांग यी और भारतीय नेताओं के बीच बातचीत सीमा विवाद के समाधान और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान खोजने पर केंद्रित रहने की उम्मीद है। इसमें व्यापारिक संबंधों को मज़बूत करना, व्यापार असंतुलन को कम करना और प्रौद्योगिकी एवं विनिर्माण में संयुक्त उद्यमों की संभावनाओं को तलाशना भी शामिल होगा। इसमें आतंकवाद सहित क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों और शंघाई सहयोग संगठन, ब्रिक्स और जी-20 जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग पर भी चर्चा होगी।

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