चंडीगढ़ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कालका रेलवे स्टेशन पर तैनात एक क्लर्क को रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया है। आरोपी की पहचान रजनीश के रूप में हुई है। आरोप है कि उसने एक सेवानिवृत्त कर्मचारी के लंबित टफ लोकेशन अलाउंस (टीएलए) की राशि जारी कराने के नाम पर दस हजार रुपए रिश्वत ली। CBI ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया है।
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के मूल निवासी हिमांशु सिंह ने सीबीआई में शिकायत दर्ज करते हुए बताया था कि उनके पिता हिमाचल प्रदेश स्थित टकसाल रेलवे स्टेशन से ट्रैकमैन के पद से सेवानिवृत्त हुए थे, लेकिन उन्हें कुछ बकाया भत्ते अब तक नहीं मिले थे।
उन्होंने बताया कि परिवार को बीते अप्रैल में जानकारी मिली थी कि पहाड़ी इलाकों में तैनात कर्मचारियों को टीएलए का बकाया भुगतान किया जा रहा है, लेकिन उनके पिता का भुगतान लंबित है, जिसके बाद उन्होंने कालका स्थित वरिष्ठ सेक्शन इंजीनियर (पी-वे) कार्यालय में आवेदन दायर कर इसकी मांग की थी साथ ही भुगतान देर होने पर गिरफ्तार क्लर्क से फोन पर संपर्क किया था तभी उन्हें अगले दिन क्लर्क ने कार्यालय में बुलाया था।
हिमांशु ने आगे बताया कि जब वह कार्यालय पहुंचे तो उन्हें पता चला कि उनके पिता के लगभग 74 हजार रुपए बकाया हैं। उसी समय क्लर्क ने कहा कि यह भुगतान जारी करवाना उसकी जिम्मेदारी है, हिमांशु ने क्लर्क पर आरोप लगाते हुए कहा कि भुगतान जल्द कराने के बदले में उनसे पहले 14 हजार रुपए की मांग की गई जिसे बाद में घटाकर 10 हजार रुपए कर दिया, साथ ही उन्हें चेतावनी दी गई कि यदि रिश्वत नहीं दी तो टीएलए का भुगतान नहीं होगा।
CBI ने शिकायत के बाद मामले की जांच की और जांच के दौरान हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग भी हासिल की। इस रिकॉर्डिंग में आरोपी की ओर से दस हजार रुपए की मांग स्पष्ट रूप से सुनाई देती है, साथ ही उसने रकम कम करने से इनकार भी किया। CBI के सब-इंस्पेक्टर मनीष कौशिक ने शुरुआती जांच में पाया कि क्लर्क ने सरकारी कार्य करने के बदले रिश्वत मांगी थी।
इन सब पहलुओं को देखते हुए CBI ने संबंधित क्लर्क के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत formal प्राथमिकी दर्ज की है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

