ईद-उल-अजहा (Bakrid 2026) 28 मई को मनाई जाएगी और त्योहार से पहले भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश की पशु मंडियों में जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, हैदराबाद से लेकर कराची और ढाका तक बाजारों में खरीदारों की भीड़ उमड़ रही है। हालांकि इस बार सबसे ज्यादा चर्चा जानवरों की बढ़ी हुई कीमतों को लेकर हो रही है।
जानकारों के अनुसार, इस बार पशुओं की कीमतों में तेजी के पीछे कई वजहें हैं। महंगाई बढ़ने के साथ-साथ ट्रांसपोर्टेशन खर्च, पशु चारे की कीमतों में उछाल और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतों में बदलाव इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर भी सप्लाई चेन और ईंधन लागत पर पड़ा है जिससे पशु बाजार प्रभावित हुए हैं।
दिल्ली और उत्तर भारत की मंडियों में बढ़े दाम
दिल्ली की जामा मस्जिद, जाफराबाद और ओखला मंडी में इस समय छोटे बकरों की कीमत लगभग 25 हजार रुपये से शुरू होकर 2 लाख रुपये तक पहुंच रही है। जमनापारी, सोजत और तोतापारी नस्ल के बड़े बकरे 5 लाख रुपये या उससे अधिक में बिक रहे हैं। वहीं बैलों की कीमत भी तेजी से बढ़ी है और गुणवत्ता के आधार पर 1 लाख से 8 लाख रुपये या उससे ज्यादा तक पहुंच रही है।
मुंबई की देवनार मंडी में राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में पशु लाए गए हैं। यहां सामान्य बकरों की कीमत 30 हजार से 80 हजार रुपये के बीच है जबकि प्रीमियम नस्लों के बकरे 7 से 10 लाख रुपये तक पहुंच रहे हैं। भारी-भरकम बैलों की कीमत 2 लाख से 12 लाख रुपये तक बताई जा रही है।
लखनऊ और हैदराबाद की मंडियों में भीड़
लखनऊ की दुबग्गा मंडी में 20 हजार रुपये से लेकर 3 लाख रुपये तक के बकरे बिक रहे हैं। कुर्बानी के लिए तैयार बड़े बैल 2 लाख रुपये से अधिक कीमत पर उपलब्ध हैं। वहीं हैदराबाद की मरेडपल्ली और चारमीनार मंडियों में तेलंगाना और कर्नाटक से आए पशु 40 हजार से डेढ़ लाख रुपये तक बिक रहे हैं।
कश्मीर में भी बढ़ी कीमतें
श्रीनगर के ईदगाह इलाके की मंडियों में भी खरीदारी तेज है। यहां बाहर से आए व्यापारी बड़ी संख्या में बकरे और बैल बेच रहे हैं। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस बार दाम काफी बढ़ गए हैं, जिससे आम खरीदारों पर असर पड़ा है।
इसके अलावा, पाकिस्तान के कराची और लाहौर की मंडियों में बकरों की कीमत 90 हजार से 1.25 लाख पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच गई है। बड़े और प्रीमियम जानवरों की कीमत कई लाख रुपये तक जा रही है। बांग्लादेश में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं जहां बढ़ती लागत और महंगाई ने पशु बाजार को प्रभावित किया है।