Union Budget 2026 : रक्षा क्षेत्र को बजट में मिला गिफ्ट, निर्मला सीतारमण ने ₹7.8 लाख करोड़ के खजाने को दी मंजूरी
आज सुबह, 1 फरवरी 2026 को, भारतीय लोकतंत्र के लिए एक अहम पल आया। संसद भवन में, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बजट पेश किया, जिसमें सबसे ज़्यादा प्राथमिकता राष्ट्रीय सुरक्षा को दी गई है।
1 फरवरी 2026 को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में आम बजट पेश किया। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी सदन में मौजूद रहे. इस बार के बजट में रक्षा क्षेत्र को लेकर सरकार ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। रक्षा मंत्रालय के लिए ₹7.8 लाख करोड़ का रिकॉर्ड आवंटन किया गया है, जो पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के ₹6.81 लाख करोड़ से करीब 14.5 प्रतिशत ज्यादा है। साफ है कि सरकार देश की सैन्य ताकत को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के मूड में है।
सरकार का फोकस इस बार भी तीनों सेनाओं को अत्याधुनिक और स्वदेशी हथियारों से लैस करने पर है। इसी दिशा में सेना के आधुनिकीकरण के लिए अलग से ₹2.19 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस राशि का इस्तेमाल नई पीढ़ी की मिसाइलों, लड़ाकू विमानों, पनडुब्बियों और हाई-टेक ड्रोन सिस्टम की खरीद में किया जाएगा।
स्टेल्थ फाइटर प्रोजेक्ट्स को मिली नई ऊर्जा
पिछले साल जहां LCH (लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर), राफेल-एम और तेजस Mk-1A जैसे अहम रक्षा सौदों पर मुहर लगी थी, वहीं इस बार नजरें और भी बड़े करारों पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि इस बजट के बाद 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) की बहुप्रतीक्षित डील को रफ्तार मिलेगी। इसके अलावा पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जैसे Su-57 से जुड़े प्रोजेक्ट्स को भी नई ऊर्जा मिलने की संभावना है।
सरकार ने साफ संकेत दे दिए हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सैन्य ताकत को मजबूत बनाए रखने के लिए जरूरी हर संसाधन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ-साथ ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने पर भी खास जोर दिया गया है। बजट का बड़ा हिस्सा भारतीय रक्षा कंपनियों के लिए आरक्षित रखा गया है, ताकि हथियारों के लिए विदेशी निर्भरता धीरे-धीरे खत्म की जा सके।
स्वदेशी रक्षा उत्पादन पर बड़ा दांव
पिछले वर्ष की तरह इस बार भी रक्षा खरीद में स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दी गई है। बीते साल जहां रक्षा खरीद का करीब 75 प्रतिशत हिस्सा भारतीय कंपनियों के लिए सुरक्षित था, वहीं इस बार इस हिस्सेदारी को और मजबूत किया जा सकता है। सेना को स्वदेशी ड्रोन, मानवरहित हवाई वाहन (UAV), अत्याधुनिक टैंक और आधुनिक युद्ध प्रणालियों से लैस करने की योजना है। HAL, DRDO के साथ-साथ निजी क्षेत्र की डिफेंस कंपनियों को भी इस बजट से बड़ा सहारा मिलने वाला है।
राफेल और Su-57 पर खास नजर
रक्षा मंत्रालय के पास कई बड़े और अहम प्रोजेक्ट्स पहले से ही पाइपलाइन में हैं, जिनके लिए फंड की व्यवस्था कर दी गई है। MRFA टेंडर को बजट के बाद नई गति मिलने की उम्मीद है, जिसमें राफेल फाइटर जेट सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
वहीं, पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर Su-57 को शामिल कर भारत अपनी वायुसेना को दुनिया की सबसे ताकतवर वायु सेनाओं की कतार में खड़ा कर सकता है। इसके अलावा समुद्री क्षेत्र में चीन की बढ़ती चुनौती को देखते हुए नई पनडुब्बियों की खरीद और समुद्री निगरानी के लिए अत्याधुनिक ड्रोन सिस्टम पर भी तेजी से काम होने की संभावना है।
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