ग्रीनलैंड पर अमेरिका का यू-टर्न... ट्रंप ने टैरिफ की धमकी ली वापस, जानिए वजह

ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने और सैन्य कार्रवाई की अटकलों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने रुख में नरमी दिखाते हुए बड़ा फैसला लिया है

Jan 22, 2026 - 07:09
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ग्रीनलैंड पर अमेरिका का यू-टर्न... ट्रंप ने टैरिफ की धमकी ली वापस, जानिए वजह

ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने और सैन्य कार्रवाई की अटकलों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने रुख में नरमी दिखाते हुए बड़ा फैसला लिया है। विश्व आर्थिक मंच (WEF) के दौरान नाटो महासचिव मार्क रुट्टे के साथ हुई द्विपक्षीय बैठक के बाद ट्रंप ने प्रस्तावित टैरिफ को फिलहाल टालने का ऐलान किया है। इसे उनकी रणनीति में अधिक व्यावहारिक और संतुलित बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

टैरिफ लागू करने का फैसला टला
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर बताया कि 1 फरवरी से लागू होने वाले टैरिफ अब आगे नहीं बढ़ाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि नाटो महासचिव के साथ हुई सकारात्मक और उपयोगी बातचीत के बाद यह निर्णय लिया गया। ट्रंप के अनुसार, इस बैठक में ग्रीनलैंड और पूरे आर्कटिक क्षेत्र को लेकर भविष्य के सहयोग और संभावित समझौते की रूपरेखा पर चर्चा हुई।

अमेरिका–नाटो सहयोग को प्राथमिकता
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित ढांचा अमेरिका और उसके नाटो सहयोगियों—दोनों के हित में होगा। इसी वजह से टैरिफ का कदम फिलहाल रोका गया है। उन्होंने यह भी बताया कि ग्रीनलैंड से जुड़े ‘गोल्डन डोम’ पर बातचीत जारी है, जिसका नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ करेंगे। जरूरत पड़ने पर अन्य अधिकारी भी इस प्रक्रिया में शामिल होंगे और सीधे राष्ट्रपति को रिपोर्ट करेंगे।

डेनमार्क ने फैसले का किया स्वागत
डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोक्के रासमुसेन ने ट्रंप के फैसले को सकारात्मक संकेत बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की महत्वाकांक्षाओं के बीच भरोसा बढ़ाने वाला है। रासमुसेन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “दिन की शुरुआत जैसी थी, उसका अंत उससे कहीं बेहतर हुआ।”

नाटो प्रमुख का भरोसा
नाटो महासचिव मार्क रुट्टे ने बैठक के दौरान ट्रंप को भरोसा दिलाया कि किसी भी संकट की स्थिति में सहयोगी देश अमेरिका के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे। उन्होंने 9/11 के बाद अफगानिस्तान में नाटो की भूमिका का जिक्र करते हुए सहयोगियों की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। ट्रंप ने इस भरोसे की सराहना की, हालांकि उन्होंने संकेत दिया कि ग्रीनलैंड को लेकर पैदा हुए तनाव ने कुछ हद तक सहयोगियों की प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े किए हैं।

सैन्य रुख से भी बनाई दूरी
दावोस में अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर सैन्य नियंत्रण की पहले की बयानबाजी से भी दूरी बनाई। उन्होंने कहा कि आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा के कारण ग्रीनलैंड का रणनीतिक महत्व बढ़ा है और यह अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। ग्रीनलैंड को ‘बर्फ का एक टुकड़ा’ बताते हुए ट्रंप ने कहा कि उस पर नियंत्रण की मांग अत्यधिक नहीं है और यह वैश्विक शांति व सुरक्षा में अहम भूमिका निभा सकता है। यह बदलाव ट्रंप की नीति में टकराव के बजाय सहयोग को प्राथमिकता देने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।

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