UP News : नोएडा सेक्टर-150 दर्दनाक हादसा, इंजीनियर की मौत होने पर दो बिल्डर कंपनियों के खिलाफ FIR दर्ज
नोएडा के सेक्टर-150 में एक निर्माणाधीन साइट पर इंजीनियर की मौत के बाद नोएडा प्राधिकरण और नामजद बिल्डर कंपनियों की काम करने की शैली पर सवाल उठ रहे हैं।
नोएडा के सेक्टर-150 में एक निर्माणाधीन साइट पर इंजीनियर की मौत के बाद नोएडा प्राधिकरण और नामजद बिल्डर कंपनियों की काम करने की शैली पर सवाल उठ रहे हैं। इस मामले में दो बिल्डर कंपनियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। जांच में सामने आया है कि इन कंपनियों पर नोएडा प्राधिकरण का करीब 3000 करोड़ रुपये का बकाया है।
कैसे हुआ हादसा ?
जानकारी के अनुसार युवराज नामक युवक गुरुग्राम से अपनी ग्रैंड विटारा कार में घर लौट रहा था। नोएडा के सेक्टर-150 में स्थित एक तीखे मोड़ पर घने कोहरे के कारण बेहद कम दिखाई दे रहा था। इसी दौरान कार चालक नियंत्रण खो बैठा। वाहन सड़क किनारे बने नाले की दीवार को तोड़ते हुए पास ही निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट में जा गिरा। बताया जा रहा है कि बेसमेंट करीब 20 से 30 फीट गहरा था और उसमें पानी भरा हुआ था, जिससे हादसा और गंभीर हो गया। घंटों मदद मांगने के बावजूद युवराज को कोई बचाने नहीं आया।
सुरक्षा इंतजामों की कमी हुई उजागर
जानकारी के अनुसार जिस जगह यह दुर्घटना हुई, वहां बुनियादी सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था, न तो साइट पर सेफ्टी बैरिकेड्स लगाए गए थे और न ही किसी तरह के चेतावनी संकेत मौजूद थे। इसी लापरवाही के चलते काम के दौरान एक इंजीनियर की जान चली गई।
प्राधिकरण-बिल्डर गठजोड़ के आरोप
हादसे के बाद नोएडा प्राधिकरण और बिल्डर कंपनियों के बीच कथित मिलीभगत के आरोप लगने लगे हैं। सवाल यह उठ रहा है कि जब बिल्डरों पर हजारों करोड़ रुपये का बकाया था, तो न तो भुगतान की सख्ती दिखाई गई और न ही निर्माण स्थल पर निगरानी रखी गई।
स्पोर्ट्स सिटी परियोजना में नियमों का उल्लंघन
जानकारी के अनुसार, 7 जुलाई 2014 को लोटस ग्रीन बिल्डर को स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के तहत यह जमीन आवंटित की गई थी। नियमों के अनुसार यहां खेल और उससे जुड़े बुनियादी ढांचे का विकास होना था, लेकिन आरोप है कि बिल्डर ने शर्तों को नजरअंदाज कर जमीन को अलग-अलग व्यक्तियों और संस्थाओं को बेच दिया।
CBI और ED की जांच शुरू
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी जांच में जुट गए हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि जमीन की बिक्री कैसे हुई और इसमें किन अधिकारियों व बिल्डर कंपनियों की भूमिका रही।
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